Friday, 28 June 2024

पेड़ की व्यथा

नकार  कर अहमियत मेरी

छुपा कर मेरे सारे गुणों को 

लगा कर खूबसूरत गमले में

काट छांट मेरी टहनियों को

बना दिया मुझको बौनसाई

पत्थर कंक्रीट के घर का 

 सजा लिया  एक कोना

 मैं समझ नहीं पाया

 उसने मुझे किया छोटा

 या खुद को कर डाला बौना 

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