नकार कर अहमियत मेरी
छुपा कर मेरे सारे गुणों को
लगा कर खूबसूरत गमले में
काट छांट मेरी टहनियों को
बना दिया मुझको बौनसाई
पत्थर कंक्रीट के घर का
सजा लिया एक कोना
मैं समझ नहीं पाया
उसने मुझे किया छोटा
या खुद को कर डाला बौना
No comments:
Post a Comment