सुख नहींं ठहरे तो दुख की बिसात क्या
गिरा दें मनोबल ऐसी इनकी औकात क्या
जैसा जीवन मिला है उसी में मुस्कुराना
रब की रजा में रहना नहींं है सौगात क्या
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