Saturday, 7 September 2024

साहिल से

 साहिल से

टकरा कर समुद्र साहिल से

मन में उठती तंरगों को 

शांत कर लेता है

झरने से गिरता पानी

टकरा कर पथरीली चट्टानों से

शांति से बह निकलता है

कल कल बहती नदियाँ

टकरा कर अपने ही शिलाखंड से

संगीत को जन्म देती है

प्रकृति कितने सुन्दर सुर छेड़ती है













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