Monday, 27 May 2024

अमलतास

        अमलतास

जेठ की तपती दुपहरी में

 सड़क के किनारे चलते हुए 

देख कर अमलतास के फूलों को

 गर्मी से कुम्लाहे चेहरे पर भी 

आ जाती है हल्की सी मुस्कान 

खिल उठता है मन भी 

तेरे सुनहरी फूलों की तरह

मन की मुस्कान के साथ-साथ 

उतर जाती है तन की थकावट भी

खड़े रहो ऐसे ही इस्तकबाल करते  हुए

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