मेरी खिड़की से सब दिखता है
चांद तारे हवा सूरज
नहीं दिखते तो बस आते जाते लोग
आपस में बतियाते हंसते हुए
नन्हें बच्चों किलकारियां मारते हुए
बिस्तर पर पड़े पड़े जो दिखता है
उसको महसूस करती हूं
और जो नहीं दिखता
उसकी कल्पना करके
खुद को खुश कर लेती हूँ
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