Tuesday, 18 June 2024

मेरी खिड़की

 मेरी खिड़की से सब दिखता है

 चांद तारे हवा सूरज

 नहीं दिखते तो बस आते जाते लोग 

आपस में बतियाते हंसते हुए

नन्हें बच्चों किलकारियां मारते हुए

बिस्तर पर पड़े पड़े जो दिखता है

 उसको महसूस करती हूं

 और जो नहीं दिखता 

उसकी कल्पना करके

खुद को खुश कर लेती हूँ

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