Wednesday, 19 October 2022

असर ऐसा

 तेरी चाहतों का रहा कुछ असर ऐसा

तेज हवाएँ ढहा जाए कुछ कहर जैसा


साथ साथ समानांतर चलते रहे

 अब आ गया जिंदगी में सहर कैसा


 सिर्फ तुम्हें बनाया था राजदार अपना 

राज खोल दिया तो रहा हमसफ़र कैसा  


बच कर रह रही हूँ सबकी निगाहों से

घोल दिया मेरी जिंदगी में ये जहर कैसा


आग लगी झुलस गया तन मन सब 

जैसे जले बदन गरमी की दोपहर जैसा


मार के पत्थर खलबली सी मचा दी 

था कभी शांत खामोश सी नहर जैसा






Friday, 14 October 2022

मेरा घर

            मेरा घर


सारी उम्र की कमाई को खर्च कर डाला
पाई पाई जोड़कर  मोहताज कर डाला

खून पसीना बहाकर जोड़ा था जो पैसा
उससे उम्मीदों का महल खरा कर डाला

जगह जगह से इक्कठे किए  सुन्दर फूल
पेड़ पौधे लगा घास उगा बगीचा बना डाला

सोचा था मिलेंगे जब फुर्सत के कुछ क्षण
मस्ती के पलों के लिए जुगाड़ बना डाला

जब मिली फुर्सत और बैठने का समय मिला
तब  बच्चों ने अलग अपना घरौंदा बना डाला

ऐसे समय साथी भी साथ छोड़ चल बसा
निराशा छा गयी विक्षिप्त सा जीवन बना डाला

महीनों बीता दिए  खुद से समझोते  करते हुए
चाय से इश्क जता खुद को आशिक बना डाला

अब मैं हूँ मेरा इश्क है और मेरी तन्हाई है
मोबाइल ले हाथ में खुद से प्यार कर डाला
               
                       


Thursday, 6 October 2022

किताबें

 खामोश सी बंद दिखने वाली किताबें 

 खोलने पर बहुत ज्यादा बोलती हैं 

लिखने वाले के दिल में दफन 

अनछुए पहलुओं के 

बरसों से  अबोले राज खोलती हैं

इनकी भी अलग  दुनिया है अपनी

दिखाकर जादूगरी शब्दों की 

पढ़ने वाले की नब्ज टटोलती हैं

 गलतियां गलतफहमियां है क्या 

क्यूँ दरारें पड़ जाती हैं दिलों में 

 ये आँखो पर पड़े पट खोलती हैं

होंसला देती हैं  जागती आँखों को 

नित नए सपनों को साकार करने का 

रवानगी दे  खुला आसमान खोजती हैं 

कुछ ऐसे मीठे से शब्द परोसकर 

कानों में शहद सा मीठा रस  घोलती हैं 

बात से बात जुड़ जुड़ कर 

बन जाती एक कहानी है 

जो पढ़ने वाले के आसपास डोलती है 

खामोश सी बंद दिखने वाली किताबें 

 खोलने पर बहुत ज्यादा बोलती हैं

Thursday, 29 September 2022

इस जिंदगानी में

 दुख बहुत मिले  इस जिंदगानी में

देख इन गमों को बल पड़े पेशानी में


 कभी ढूँढनी चाही ही नहीं खुशियाँ

बस  हरदम घूमते   रहे परेशानी में


जिंदगी को लेकर बुने थे जो ख्वाब

बुलबुले की भांति बह गए पानी में


टूटा हुआ दिल लिए फिरते रहे यूँ ही

रो कर ही काट लिये दिन जवानी में


फिर एक दिन सोचा खुद के बारे में

आ गया उस दिन एक मोड़ कहानी में


जीने लगी अब एक नई सी दुनिया में

जिंदगी चलने लगी फिर से रवानी में


छोड़ सब गम खुद को दी  नई मुस्कान

छोड़ कर दिया खुद को हवा सुहानी में

 

अब समझ आया वो जिंदगी ही क्या

हंसते हंसते जो कट जाए आसानी में

              

                   

          

Saturday, 24 September 2022

ਬਚਪਨ

 ਅਜਿਹੇ ਵੀ ਕੁਝ ਵੇਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ 

ਜਗ ਤੋਂ ਪਿਆਰੇ ਜਿਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ 


        ਅੱਜ ਵੀ ਉਸਦੀ ਯਾਦ  ਆਂਦੀ ਹੈ

      ਖਿੜਖਿੜ ਹੱਸਣ ਦੀ ਆਵਾਜ ਆਂਦੀ ਹੈ

       ਬੀਤ ਗਏ ਜਿਹੜੇ ਦਿਨ ਨਿਆਣਿਆਂ  ਦੇ 

     ਉਸਦੀ ਤਾਂ ਬਸ ਹੁਣ  ਯਾਦ ਰੁਆਂਦੀ ਹੈ


ਹਰ ਦਿਨ ਨਿਤ ਨਵੇ ਖੇੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ 

 ਇਹੋ ਜਿਹੇ ਵੀ ਕੁਝ ਵੇਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ 

ਜਗ ਤੋਂ  ਪਿਆਰੇ ਜਿਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ 


       ਪੜ੍ਹਨ ਦੀ ਨਾ ਕੋਈ ਬਾਤ ਹੁੰਦੀ ਸੀ

    ਦੋਸਤਾਂ ਵਿਚ ਨਾ ਕੋਈ ਜਾਤ ਹੁੰਦੀ ਸੀ

ਹਰ ਵੇਲੇ ਹੱਸਣਾ ਖੇਡਣਾ ਤੇ ਖੁਸ਼ ਰਹਿਣਾ 

ਭੱਜਦਿਆਂ ਨਸਦਿਆਂ ਹੀ ਰਾਤ ਹੁੰਦੀ ਸੀ


ਖੇਡਣ ਨੂੰ ਬਸ ਰੇਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ

ਇਹ ਜੇ ਵੀ ਕੁਝ ਵੇਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ 

ਜਗ ਤੋ ਪਿਆਰੇ ਜੇਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ 


         ਜਿੱਥੇ ਬੈਠੇ  ਔਖੇ ਹੀ ਖਾ ਲੈਂਦੇ ਸੀ 

         ਜੋ ਮਿਲਿਆ ਔਹੀ ਪਾ ਲੈਂਦੇ ਸੀ

     ਤੇਰ ਮੇਰ ਦੀ ਕੋਈ ਥਾਂ ਨਹੀਂ ਸੀ 

     ਚਾਚੇ ਮਾਮੇ ਤੋਂ ਵੀ ਕੁੱਟ ਖਾਂ ਲੈਂਦੇ ਸੀ


ਸਾਰੇ ਭੈਣ ਭਰਾ ਨੇੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ 

ਇਹਜੇ ਵੀ ਕੁਝ ਵੇਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ 

ਜਗ ਤੋਂ ਪਿਆਰੇ ਜਿਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ

Tuesday, 20 September 2022

दिल के दीए

 

जी रहे हैं बुझा के दिल के दिए
हैं महफ़िल में दिल तन्हा लिए

क्या बताएं कि कैसे जी रहे हैं
आंसू बस पलकों ने ही है पिए

अब छोड़ दिया है दर्द में जीना
जब से छोड़ दुखों को लब सिए

डसने लगी थी दिल की तन्हाई
इसलिए महफ़िल से लगाए हि

कहने को रहती हूँ मै बहुत खुश
इसको पाने के लिए  जतन किए

तन्हा दिल और हर महफ़िल भाए
कुछ इस तरह नीलम जिंदगी जिए



Sunday, 18 September 2022

ये ख्वाब

 चुरा के आंखों से नींद रात भर जगाए

अधूरे ही रहेंगे पर ये ख्वाब मुझे भाए


चले आओ जिंदगी में कभी यूँ ही

क्यूँ ना हर लम्हा तेरे साथ ही बिताए


तन्हाई ने घर बना लिया है मेरे  दिल में

शायद गमों का बोझ ही हल्का हो जाए


जानती हूँ साथ ना निभा पाओगे उम्र भर

 कुछ कदम साथ चलने का वादा किया जाए 


दुखों ने साथ दिया है जिंदगी के हर मोड़ पर

फिर क्यूँ ना गमों को प्यार से सहलाया जाए


अधूरी  ख्वाहिशों के साथ जीना ही जिंदगी है

चलो हंसकर ही सही हसरतों को  दबाया जाए


दोस्तों की महफ़िल में मिल जाती है खुशी

नीलम हर हाल रूठे दोस्तों को मनाया जाए