Thursday, 29 September 2022

इस जिंदगानी में

 दुख बहुत मिले  इस जिंदगानी में

देख इन गमों को बल पड़े पेशानी में


 कभी ढूँढनी चाही ही नहीं खुशियाँ

बस  हरदम घूमते   रहे परेशानी में


जिंदगी को लेकर बुने थे जो ख्वाब

बुलबुले की भांति बह गए पानी में


टूटा हुआ दिल लिए फिरते रहे यूँ ही

रो कर ही काट लिये दिन जवानी में


फिर एक दिन सोचा खुद के बारे में

आ गया उस दिन एक मोड़ कहानी में


जीने लगी अब एक नई सी दुनिया में

जिंदगी चलने लगी फिर से रवानी में


छोड़ सब गम खुद को दी  नई मुस्कान

छोड़ कर दिया खुद को हवा सुहानी में

 

अब समझ आया वो जिंदगी ही क्या

हंसते हंसते जो कट जाए आसानी में

              

                   

          

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