खामोश सी बंद दिखने वाली किताबें
खोलने पर बहुत ज्यादा बोलती हैं
लिखने वाले के दिल में दफन
अनछुए पहलुओं के
बरसों से अबोले राज खोलती हैं
इनकी भी अलग दुनिया है अपनी
दिखाकर जादूगरी शब्दों की
पढ़ने वाले की नब्ज टटोलती हैं
गलतियां गलतफहमियां है क्या
क्यूँ दरारें पड़ जाती हैं दिलों में
ये आँखो पर पड़े पट खोलती हैं
होंसला देती हैं जागती आँखों को
नित नए सपनों को साकार करने का
रवानगी दे खुला आसमान खोजती हैं
कुछ ऐसे मीठे से शब्द परोसकर
कानों में शहद सा मीठा रस घोलती हैं
बात से बात जुड़ जुड़ कर
बन जाती एक कहानी है
जो पढ़ने वाले के आसपास डोलती है
खामोश सी बंद दिखने वाली किताबें
खोलने पर बहुत ज्यादा बोलती हैं
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