Thursday, 6 October 2022

किताबें

 खामोश सी बंद दिखने वाली किताबें 

 खोलने पर बहुत ज्यादा बोलती हैं 

लिखने वाले के दिल में दफन 

अनछुए पहलुओं के 

बरसों से  अबोले राज खोलती हैं

इनकी भी अलग  दुनिया है अपनी

दिखाकर जादूगरी शब्दों की 

पढ़ने वाले की नब्ज टटोलती हैं

 गलतियां गलतफहमियां है क्या 

क्यूँ दरारें पड़ जाती हैं दिलों में 

 ये आँखो पर पड़े पट खोलती हैं

होंसला देती हैं  जागती आँखों को 

नित नए सपनों को साकार करने का 

रवानगी दे  खुला आसमान खोजती हैं 

कुछ ऐसे मीठे से शब्द परोसकर 

कानों में शहद सा मीठा रस  घोलती हैं 

बात से बात जुड़ जुड़ कर 

बन जाती एक कहानी है 

जो पढ़ने वाले के आसपास डोलती है 

खामोश सी बंद दिखने वाली किताबें 

 खोलने पर बहुत ज्यादा बोलती हैं

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