जी रहे हैं बुझा के दिल के दिए
हैं महफ़िल में दिल तन्हा लिए
क्या बताएं कि कैसे जी रहे हैं
आंसू बस पलकों ने ही है पिए
अब छोड़ दिया है दर्द में जीना
जब से छोड़ दुखों को लब सिए
डसने लगी थी दिल की तन्हाई
इसलिए महफ़िल से लगाए हिए
कहने को रहती हूँ मै बहुत खुश
इसको पाने के लिए जतन किए
तन्हा दिल और हर महफ़िल भाए
कुछ इस तरह नीलम जिंदगी जिए
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