Tuesday, 20 September 2022

दिल के दीए

 

जी रहे हैं बुझा के दिल के दिए
हैं महफ़िल में दिल तन्हा लिए

क्या बताएं कि कैसे जी रहे हैं
आंसू बस पलकों ने ही है पिए

अब छोड़ दिया है दर्द में जीना
जब से छोड़ दुखों को लब सिए

डसने लगी थी दिल की तन्हाई
इसलिए महफ़िल से लगाए हि

कहने को रहती हूँ मै बहुत खुश
इसको पाने के लिए  जतन किए

तन्हा दिल और हर महफ़िल भाए
कुछ इस तरह नीलम जिंदगी जिए



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