Friday, 14 October 2022

मेरा घर

            मेरा घर


सारी उम्र की कमाई को खर्च कर डाला
पाई पाई जोड़कर  मोहताज कर डाला

खून पसीना बहाकर जोड़ा था जो पैसा
उससे उम्मीदों का महल खरा कर डाला

जगह जगह से इक्कठे किए  सुन्दर फूल
पेड़ पौधे लगा घास उगा बगीचा बना डाला

सोचा था मिलेंगे जब फुर्सत के कुछ क्षण
मस्ती के पलों के लिए जुगाड़ बना डाला

जब मिली फुर्सत और बैठने का समय मिला
तब  बच्चों ने अलग अपना घरौंदा बना डाला

ऐसे समय साथी भी साथ छोड़ चल बसा
निराशा छा गयी विक्षिप्त सा जीवन बना डाला

महीनों बीता दिए  खुद से समझोते  करते हुए
चाय से इश्क जता खुद को आशिक बना डाला

अब मैं हूँ मेरा इश्क है और मेरी तन्हाई है
मोबाइल ले हाथ में खुद से प्यार कर डाला
               
                       


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