चुरा के आंखों से नींद रात भर जगाए
अधूरे ही रहेंगे पर ये ख्वाब मुझे भाए
चले आओ जिंदगी में कभी यूँ ही
क्यूँ ना हर लम्हा तेरे साथ ही बिताए
तन्हाई ने घर बना लिया है मेरे दिल में
शायद गमों का बोझ ही हल्का हो जाए
जानती हूँ साथ ना निभा पाओगे उम्र भर
कुछ कदम साथ चलने का वादा किया जाए
दुखों ने साथ दिया है जिंदगी के हर मोड़ पर
फिर क्यूँ ना गमों को प्यार से सहलाया जाए
अधूरी ख्वाहिशों के साथ जीना ही जिंदगी है
चलो हंसकर ही सही हसरतों को दबाया जाए
दोस्तों की महफ़िल में मिल जाती है खुशी
नीलम हर हाल रूठे दोस्तों को मनाया जाए
No comments:
Post a Comment