Sunday, 18 September 2022

ये ख्वाब

 चुरा के आंखों से नींद रात भर जगाए

अधूरे ही रहेंगे पर ये ख्वाब मुझे भाए


चले आओ जिंदगी में कभी यूँ ही

क्यूँ ना हर लम्हा तेरे साथ ही बिताए


तन्हाई ने घर बना लिया है मेरे  दिल में

शायद गमों का बोझ ही हल्का हो जाए


जानती हूँ साथ ना निभा पाओगे उम्र भर

 कुछ कदम साथ चलने का वादा किया जाए 


दुखों ने साथ दिया है जिंदगी के हर मोड़ पर

फिर क्यूँ ना गमों को प्यार से सहलाया जाए


अधूरी  ख्वाहिशों के साथ जीना ही जिंदगी है

चलो हंसकर ही सही हसरतों को  दबाया जाए


दोस्तों की महफ़िल में मिल जाती है खुशी

नीलम हर हाल रूठे दोस्तों को मनाया जाए



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