Wednesday, 3 August 2022

दीवाने हो जाते हैं

 दीवाने हो जाते हैं

कैसे कुछ किस्से पुराने हो जाते हैं

 जब अपने लोग भी बेगाने हो जाते हैं


मची है पैसा कमाने की होड़ कुछ ऐसी 

अब अपनों से मिले ही जमाने हो जाते हैं


एक तुम्हें ही क्यों दोषी ठहराया जाए 

काम निकलने पर सब सयाने हो जाते हैं


पागल  ही होते हैं जाने क्यों कुछ लोग

पहली ही नजर में बस दीवाने हो जाते हैं


चली हैं जमाने में शक की हवाएँ इस तरह 

जरा सी बात पर खत्म अफसाने हो जाते हैं


कीमत समझते हैं जो लोग दोस्तों की 

वो उनके लिए अनमोल खज़ाने हो जाते हैं


साथ देते हैं जो बुरे वक़्त में किसी का 

जाने कब मीत वो अनजाने हो जाते हैं

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