दीवाने हो जाते हैं
कैसे कुछ किस्से पुराने हो जाते हैं
जब अपने लोग भी बेगाने हो जाते हैं
मची है पैसा कमाने की होड़ कुछ ऐसी
अब अपनों से मिले ही जमाने हो जाते हैं
एक तुम्हें ही क्यों दोषी ठहराया जाए
काम निकलने पर सब सयाने हो जाते हैं
पागल ही होते हैं जाने क्यों कुछ लोग
पहली ही नजर में बस दीवाने हो जाते हैं
चली हैं जमाने में शक की हवाएँ इस तरह
जरा सी बात पर खत्म अफसाने हो जाते हैं
कीमत समझते हैं जो लोग दोस्तों की
वो उनके लिए अनमोल खज़ाने हो जाते हैं
साथ देते हैं जो बुरे वक़्त में किसी का
जाने कब मीत वो अनजाने हो जाते हैं
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