Tuesday, 19 July 2022

सिला

 



                सिला

मेरी चाहतों का नहीं  सिला  मिला
जिंदगी भर सबसे ही गिला मिला

खार ही आए मेरे हिस्से में तो
कभी कोई फूल नहीं खिला मिला

सपनों के साथ उड़ना चाहा जब
रीति-रिवाज का खड़ा किला मिला

मरहम लगाती रही उम्रभर जिसपर
हर बार जख्म वही छिला मिला

नदिया की धार सी बह निकली
लाख राह में अड़ा शिला मिला

जब तराश  लिया वजूद  अपना
फिर नीलम को सारा विला मिला 

No comments:

Post a Comment