भुगतान
बीती जिंदगी के भुगतान कर रहे हैं
जिंदगी पर बस अहसान कर रहे हैं
खूबसूरत मीत यार थे जो बचपन के
दे धोखा खुद को अनजान कर रहे हैं
बन शातिर तमाशाई खड़े हैं भीड़ में
लगा आज उससे नई पहचान कर रहे हैं
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