Wednesday, 24 August 2022

रुकना नहीं

 रुकना नहीं

चलते हुए  अब रुकना नहीं

झूकाए कोई तो झूकना नहीं

       तलाश कर रही  थी

       जिस मंजिल की बरसों से

        आने वाली है बस वो

ठहर जरा पर थकना नहीं

चलते हुए अब  रुकना नहीं

झूकाए कोई तो झूकना नहीं

                हैं रास्ते टेढ़े तो क्या

             थकने लगे हैं पांव तो क्या

              धूप की तपन है तो क्या

कुछ भी हो पीछे  हटना नहीं

चलते हुए अब रुकना नहीं

झूकाए कोई तो झूकना नहीं

           राह में मिलेंगे खार भी

           तेज धूप रेत जैसे थार की

         मन में ना आने पाए हार की

मजबूत रख इरादे डटना वहीं

चलते हुए अब रुकना नहीं

झूकाए कोई तो झूकना नहीं

               हरदम है एक नया संघर्ष

               मन में उठे नया जोश सहर्ष

             नहीं सोचना करम का निष्कर्ष

हालात कैसे भी हो टूटना नहीं

चलते हुए अब रुकना नहीं

झूकाए कोई तो झूकना नहीं

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