Thursday, 4 August 2022

कुछ पल उधार ले

 आ जिंदगी से कुछ पल उधार ले

फिर वो वक़्त साथ मेरे गुजार ले 


खो गया जो समय नासमझी में 

जी कर साथ जीवन को संवार ले


उलझ गई किसी धागे की मानिंद

सुलझा जिंदगी का एक एक तार ले


हर पल है एक नई जंग जिंदगी

कयूँ ना इसे आइने में उतार ले 


लौट  आए शायद बीता हुआ वक़्त

आओ मिलकर दिल से  पुकार ले


हसरत है अच्छा जीवन जीने की गर 

क्यों न वक़्त को वक़्त पर ही वार ले 


निकल आएगें इस तरह निराशा से

अगर  अंधेरे को उजालों से मार ले

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