Monday, 15 August 2022

सावन

 


           सावन

हर सावन कुछ इस तरह आए
कोई मुस्कुराए कोई नीर बहाए

कोई  बैठ बगीचे  में पकौड़े खाए
कोई रोटी को भी तरसता जाए

बारिश की बूँद कहीं मन बहलाए
यही बूँद  किसी की छत टपकाए

किसी को सावन सब हरा दिखाए
कोई  रोज की रोटी रोजी से जाए

पानी में कागज की नाव बनाए
बच्चों को यह मयस्सर हो जाए

खुशियों भरे दिन यहाँ सब बिताएं
नीलम करे सबके लिए बस यही दुआएं
                 




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