सावन
हर सावन कुछ इस तरह आए
कोई मुस्कुराए कोई नीर बहाए
कोई बैठ बगीचे में पकौड़े खाए
कोई रोटी को भी तरसता जाए
बारिश की बूँद कहीं मन बहलाए
यही बूँद किसी की छत टपकाए
किसी को सावन सब हरा दिखाए
कोई रोज की रोटी रोजी से जाए
पानी में कागज की नाव बनाए
बच्चों को यह मयस्सर हो जाए
खुशियों भरे दिन यहाँ सब बिताएं
नीलम करे सबके लिए बस यही दुआएं
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