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हसीं जिन्दगी साथ मेरे बिताकर
चले जा रहे अब वो नजरें चुराकर
मिटे जो वतन पर नमन उनको मेरा
चलो याद उनको करें मुस्कुरा कर
फिजा दोपहर की हुई गर्म ऐसी
पसीने में आई हूँ जैसे नहाकर
गया लूट मेरा ही सामान सारा
अमीरी का वो रौब मुझपर दिखाकर
बचा लो वतन नील दंगों से अपना
कहानी गुलामी की सबको सुनाकर






