Tuesday, 9 June 2026

गज़ल 38

 










122   122       122        122


1.है मुश्किल यूँ रहना भी अब प्यार के बिन
था कोई भी  चारा न इजहार के बिन

2सिखा कर मुझे प्यार  दिल से  लगाया
कटी जिंदगी फिर तो तकरार के बिन

3.नहीं पार होती नदी हो जो गहरी
चले नाव कैसे यूँ पतवार के  बिन

4.मसीहा बनो दूसरों के लिए अब
ये दुनिया चले ना सरोकार के बिन

5.अधूरा सफर जिन्दगी का रहेगा
ये पूरा न होगा मिले खार के बिन

6.जो देखे हैं सपने खुली आंख मैनें
कि  खुशियां मिली  हैं यूँ त्योहार के बिन
 

7.करो कोशिशें नील आगे बढ़ो फिर
कि मिलती नहीं जीत यूँ हार के बिन
              डॉ नीलम नील



       

Sunday, 7 June 2026

गज़ल 37

 



212  212  212 212


1.हो गया वह मुझी से  खफा एक दिन
कह गया मुझ को ही बेवफा एक दिन

दफ़्न मैंने किये राज़ मन में मगर
राज़ फिर भी तो खुल ही गया एक दिन

आ चलें छोड़ गलियाँ ये महबूब की
याद अब वो करेगी वफ़ा एक दिन

दौर मुश्किल है माना ये अब आज का
ठीक हो जाएगा ये समा एक दिन

हर तरफ़ धुंध कोहरा था छाया हुआ
धुंध से वह  निकल ही गया एक दिन'

छोड़ कर चल दिया वो अधर में मुझे
उलझनें ज़िंदगी की बता एक दिन

लूट कर खा गए देश को नील वे
खुद को कहते थे जो रहनुमा एक दिन
      डॉ नीलम नारंग एडवोकेट मोहाली