Thursday, 26 March 2026

गज़ल 33

 



122 122 122 122


हसीं जिन्दगी साथ मेरे बिताकर
चले जा रहे अब वो नजरें चुराकर

मिटे  जो वतन पर नमन उनको मेरा
चलो याद उनको करें मुस्कुरा कर

फिजा दोपहर की हुई गर्म  ऐसी
पसीने में आई हूँ जैसे नहाकर

गया लूट मेरा ही सामान सारा
अमीरी का वो रौब मुझपर दिखाकर

बचा लो वतन  नील दंगों से अपना
कहानी गुलामी की सबको  सुनाकर

No comments:

Post a Comment