Friday, 21 November 2025

चटनी

       







चटनी

बहुत साल पीसी है मैंने 

चटनी सिलवटें पर

वह सिर्फ चटनी नहीं थी 

उसमें पिसे हुए थे

 मेरे कुछ जज्बात कुछ खुशी के लम्हे 

जो बीत ना पाए थे  साथ मेरे

धनिया  पुदीने  की पत्तियों के साथ 

पिसे हैं मैंने अपने ताजा  कोमल ख्वाब  इसी सिलबट्टे पर 

मुझ से पहले भी 

 कई बार पिस चुके हैं 

 उन औरतों के  सपने 

जिनके नरम पोटो ने छुआ है

मुझ से पहले  सिलबट्टे को 

 कई पीढ़ियों की औरतों को छला है

 मरहूम किया है अपने  सपनों से

 दूसरों की रोटी का स्वाद 

और भी स्वाद बनाने के लिए

 पर मैं नहीं चाहती मेरे बाद

कोई  छुए इस सिलबट्टे को

और पीस दे अपने अरमानों को

 चटनी के साथ साथ

 

Tuesday, 4 November 2025

ਆਪਣੀ ਖੁਸ਼ਿਆਂ

         








ਜਵਾਨ ਹੁੰਦੀ ਹਰ ਕੂੜੀ ਕੋਲ

ਹੁੰਦੇ ਨੇ ਦੋ ਰਾਹ

ਵਿਚਲਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ

ਕੇੜੇ ਰਾਹ ਤੇ ਚੱਲੇ

ਇਕ ਰਾਹ  ਉਹ ਹੁੰਦੀ ਹੈ

ਜੋ ਮਾਂ-ਪਿਉ ਦੀ  ਦਿਖਾਈ ਹੁੰਦੀ ਹੈ 

ਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਵੀ ਉਸਨੂੰ ਤੁਰਨਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ

ਸਦੀਆਂ ਤੋ ਚੱਲੀ ਆਈ ਊਸ ਰਾਹ ਤੇ

ਦੁਜੀ ਰਾਹ ਹੁੰਦੀ ਹੈ

ਜਿਸਤੇ ਚੱਲ ਕੇ ਉਹ  ਲਭਣੀ ਚਾਹੁੰਦੀ ਹੈ

ਆਪਣੀ  ਖੁਸ਼ੀਆਂ ਅਪਣਾ ਸੁੁਕੁਨ

ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਕੁੜੀਆਂ ਤੁਰਦਿਆਂ ਨੇ

ਨਵੀਆਂ ਰਾਹਵਾਂ ਤੇ

ਪਰ ਜੋ ਵੀ ਤੁਰਦਿਆਂ ਨੇ 

ਬਨਾ ਲੈਦਿਆਂ ਨੇ ਆਪਣੇ ਲਈ ਥਾਂ

ਸਿਰਜ ਲੈਂਦੀਆ ਨੇ ਇਕ ਨਵਾਂ ਜਹਾਂ

ਇਤਿਹਾਸ ਯਾਦ ਰੱਖਦਾ ਹੈ ਊਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ

ਤੇ ਅਮਰ ਹੋ ਜਾਦਿਆਂ ਨੇ ਊਹ

ਹਮੇਸ਼ਾ ਹਮੇਸ਼ਾ ਦੇ ਲਈ


Tuesday, 21 October 2025

24 गज़ल

 




122         122       122      122


 ये  सखावत रहेगी यही तय हुआ था
बिछड़ना नही अब यही तय हुआ था

दिखे रंग कोई भी हम खुश रहें गे
लियाक़त रखेंगे यही तय हुआ था

.युवाओं   नशा छोड़ दो साथ  हम हैं
दिखाना है जज्बा  यही तय हुआ था

 फरिश्ता नहीं अब बनाना किसी को

मसीहा बनेंगे  यही तय हुआ था

न भटकेंगे अब राह हमसब  यूँ नीलम
नई राह खोजें यही तय हुआ था

Saturday, 11 October 2025

गज़ल 23

 



1222   1222    122      212  22
1.जिसे सपनों में मैंने था बसाया वो तुम्हीं तो हो
जिसे किस्मत ने मेरी आजमाया वो तुम्हीं तो हो

2.धरम  हथियार बन ठगता रहा सदियों से लोगों को
इसी नफरत से दुनिया को जलाया  वो तुम्हीं तो हो

3. नयामत जिंदगी बनती हमारी साथ चलने से
उम्र भर साथ चल जीना सिखाया वो तुम्हीं तो हो

4किया  वादा फलक से तोड़ लाऊंगा सितारे अब
मेरी हर राह को आसां         बनाया वो तुम्हीं तो हो

5 नफासत छू गई तेरी मुझे इस प्यार से नीलम
नजर से प्यार यूँ  दिल में जगाया वो तुम्हीं
तो हो
      

Tuesday, 7 October 2025

गज़ल 22

 



122    122     122   12

तेरी याद में बुत बनाउंगा मैं
उसी बुत से घर को सजाऊंगा मैं

उधारी बढ़ी है कमाई घटी
रखा कर्ज लेकिन चुकाऊंगा मैं

अभी तक  मैं बेघर  गली में रहा
किसी दिल में इक घर बसाऊंगा मैं

जिन्होंने अभी तक दिया है दग़ा
उन्हीं को गले से लगाऊंगा मैं

लिखा था कभी ख़त उसे प्यार से
जुदाई पे सबको पढ़ाऊंगा मैं

तेरी याद में बुत बनाउंगा मैं
उसी बुत से घर को सजाऊंगा मैं
         

Wednesday, 1 October 2025

तुम ही तो

 






.बसाया था जिसे सपनों में मैंने तुम ही तो थे ना
उठाए थे कभी नखरे  हमारे भी   तुम ही तो थे ना
2.नयामत जिंदगी बनती हमारी साथ चलने से
किया आसान मुश्किल राह को वो  तुम ही तो थे ना
3.धर्म हथियार बन ठगता रहा सदियों से लोगों को

हवा नफरत की फैलाने में माहिर तुम ही तो थे ना
4.शिकारी जाल फैला कर पकड़ता मीन समुद्र में
जहाजों में चढ़ा निर्यात वाले तुम ही तो थे ना

5दिवस हिन्दी मना तौहीन करते रोज़ इस की भी
बधाई अंग्रेजी में यूँ देते तुम ही तो थे ना


Monday, 29 September 2025

गज़ल 21

 

         


122    122    12 2   122


हवा चल रही फल  को बिखरा रहे हैं
गरीबों के बच्चों  को तरसा रहे हैं


दिया प्यार बेइंतहा जिन्दगी ने
उसी प्यार में खुद को बहका रहे हैं


परायी हूँ पर मान है दो घरों में
उसी मान से घर को महका रहे हैं


ठहर ही गए हैं  किसी रेत पर गम
जमीं पर नमी अब ये फिसला रहे हैं


कदम बढ़ चले तुझ से मिलने को नीलम
अना तेरी तुझको ही भटका रहे हैं