कलम
मै कलम हूँ
उतार देती हूँ भावनाएँ पन्नों पर
निकलती हैं जो लेखक के
मन की गहराइयों से
किसी के इश्क़ की नाकामियां
बेवफाईयां किसी आशिक की
गम की स्याही में डुबे जज़बात
किसी अपने से ही खार सी चुभती बातें
चाहत भरी ख्वाबों ख्यालों की रातें
लिख देती हूँ सबके मन के भाव
वो प्रेम में डुबी हुई पहली मुलाकात
दिल में उठते हुए प्रणय के जज्बात
किसी को मिलने पर बढ़ना धड़कन का
किसी से बिछड़ने पर दिल के हालात
लिखने वाले की भावनाओं का हाल
मेल खा जाता है पढ़ने वाले के हाल से
मै ही माध्यम बनती हूँ दोनों के बीच
मै ही रहती हूँ साक्षी दोनों के दिल की
मैं कलम हूँ
बदल देती हूँ सबके तख्तोताज
उगल देती हूँ सबके मन के राज
बहुत ताकतवर हूँ शमशीर से
मुझसे प्रभावित है कल और आज
मै कलम हूँ
उतार देती हूँ भावनाएँ पन्नों पर
निकलती हैं जो लेखक के
मन की गहराइयों से