Sunday, 18 June 2023

एक दिन

 


           एक दिन

आज तक भी कहाँ हूँ भूल पाई 

पापा संग बिताया दिन बचपन का

खूब घुमाया जीप में यहाँ वहाँ

रबड़ी, रसगुल्ला आईसक्रीम खिलाई

छोड़ कर रौब दाब हंसें खेले मुझ संग

उस दिन एक नया रूप देख पाई

मेरी मनपसंद जगह पर लेकर गए

ये देख भाई ने की  खूब लड़ाई

मै भी उस दिन अकड़ के बोली

पापा को मुझसे ज्यादा प्यार  है भाई

उलझते गए जिंदगी के झमेलों में वो

चाहकर भी फिर वैसा दिन ना बीता पाई


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