एक दिन
आज तक भी कहाँ हूँ भूल पाई
पापा संग बिताया दिन बचपन का
खूब घुमाया जीप में यहाँ वहाँ
रबड़ी, रसगुल्ला आईसक्रीम खिलाई
छोड़ कर रौब दाब हंसें खेले मुझ संग
उस दिन एक नया रूप देख पाई
मेरी मनपसंद जगह पर लेकर गए
ये देख भाई ने की खूब लड़ाई
मै भी उस दिन अकड़ के बोली
पापा को मुझसे ज्यादा प्यार है भाई
उलझते गए जिंदगी के झमेलों में वो
चाहकर भी फिर वैसा दिन ना बीता पाई
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