Sunday, 7 May 2023

फितूर

           फितूर

जज्बा ये इश्क़ का सबको

 ना जाने क्यूँ लगता फितूर है

यहाँ हर इक है दीवाना

इश्क़ के नशे में चूर है

चाहतों पर किसका जोर है

हर कोई आशिकी में मगरूर है

प्यार इबादत का  ही रुप है

खुदा को भी इसपर गरुर है

ये तो नेमत है खुदा की 

हर एक को चाहिए जरूर है

खुशियाँ ढूँढते हैं सब इसमें 

इसी से तो जिंदगी भरपूर है 

सदियों से चली आई है प्रथा

आशिकों के किस्से मशहूर है

जज्बा ये इश्क़ का सबको

ना जाने क्यूँ लगता फितूर है


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