Sunday, 25 June 2023

मुंतज़िर

 मुंतज़िर हूँ आज भी तेरी इक आवाज का

गीत लिख लिए  कई इंतजार है साज का 

शायद इस तरह ढ़ूंढ़ पांऊ तेरे दिल में जगह

 बना सकूँ मुरीद तुझे अपने अल्फाज का 

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