मुंतज़िर हूँ आज भी तेरी इक आवाज का
गीत लिख लिए कई इंतजार है साज का
शायद इस तरह ढ़ूंढ़ पांऊ तेरे दिल में जगह
बना सकूँ मुरीद तुझे अपने अल्फाज का
मुंतज़िर हूँ आज भी तेरी इक आवाज का
गीत लिख लिए कई इंतजार है साज का
शायद इस तरह ढ़ूंढ़ पांऊ तेरे दिल में जगह
बना सकूँ मुरीद तुझे अपने अल्फाज का
एक दिन
आज तक भी कहाँ हूँ भूल पाई
पापा संग बिताया दिन बचपन का
खूब घुमाया जीप में यहाँ वहाँ
रबड़ी, रसगुल्ला आईसक्रीम खिलाई
छोड़ कर रौब दाब हंसें खेले मुझ संग
उस दिन एक नया रूप देख पाई
मेरी मनपसंद जगह पर लेकर गए
ये देख भाई ने की खूब लड़ाई
मै भी उस दिन अकड़ के बोली
पापा को मुझसे ज्यादा प्यार है भाई
उलझते गए जिंदगी के झमेलों में वो
चाहकर भी फिर वैसा दिन ना बीता पाई
अजाब
ये जो जिंदगी की किताब है
इश्क़ में तो लगती लाजवाब है
जब धोखा कर जाए आशिक
विरह में यही लगती अजाब है
किसी रोते को हंसाते है जब
यही जिंदगी लगती सबाब है
आशिक को मिल जाए महबूब
जिंदगी उसे बना देती नवाब है
प्यार में होता है जब भी कोई
उसे जिंदगी लगती शबाब है
बिछड़ जाए जिससे जब कोई
उसे लगती जिंदगी खराब है
गर करते हो अपनों से बेवफाई
देना पड़ेगा जिंदगी को जवाब है
फितूर
जज्बा ये इश्क़ का सबको
ना जाने क्यूँ लगता फितूर है
यहाँ हर इक है दीवाना
इश्क़ के नशे में चूर है
चाहतों पर किसका जोर है
हर कोई आशिकी में मगरूर है
प्यार इबादत का ही रुप है
खुदा को भी इसपर गरुर है
ये तो नेमत है खुदा की
हर एक को चाहिए जरूर है
खुशियाँ ढूँढते हैं सब इसमें
इसी से तो जिंदगी भरपूर है
सदियों से चली आई है प्रथा
आशिकों के किस्से मशहूर है
जज्बा ये इश्क़ का सबको
ना जाने क्यूँ लगता फितूर है
थोड़ी सी खुशी
कभी कभी निकल जाया करो यारों
भीड़भाड़ से अलग सुनसान सी राहों पर खोजने खुद के लिए थोड़ी सी खुशी
तन्हाई यादों संग बीता लिया करो
यारों के साथ बिताए हसीन पल
याद करके थोड़ा मुस्कुरा लिया करो
याद करना चाय की वो टपरी
यारों संग बिताई वो हसीन शामें
याद करना वह पल पैसे के अभाव में
जब यारों के साथ सांझा की थी चाय
सच मानो वो काम करेगी टॉनिक का
बचपन की हसीन यादें और बेफिक्री
बेवजह मुस्कुराहट ला देंगी चेहरे पर
तब के बिताए सुकून भरे पल
आज के दर्द भरी जिंदगी में बहुत राहत देंगे
इसलिए यारों रह लिया करो कभी कभी
यूँ ही बेवजह यारों, यादों संग तन्हाई में
ਵੇ ਜੱਟਾ ਆਈ ਵਿਸਾਖੀ
ਮੂੱਕ ਗਈ ਕਣਕਾ ਦੀ ਰਾਖੀ
ਵੇ ਜੱਟਾ ਆਈ ਵਿਸਾਖੀ
ਚਲ ਚੱਲਿਏ ਹੂਣ ਮੇਲੇ ਨੂੰ
ਖੇਲਿਏ ਮਸਤੀ ਦੇ ਖੇਲੇ ਨੂੰ
ਤਕਿਏ ਸਜਦੇ ਹੋਏ ਠੇਲੇ ਨੂੰ
ਧਕਿਏ ਅੱਗੇ ਏਸ ਰੇਲੇ ਨੂੰ
ਆ ਬਨਿਏ ਏਸ ਮੇਲੇ ਦੇ ਸਾਖੀ
ਮੂੱਕ ਗਈ ਕਣਕਾ ਦੀ ਰਾਖੀ
ਵੇ ਜੱਟਾ ਆਈ ਵਿਸਾਖੀ
ਆ ਸੁਨਿਏ ਗੱਲ ਜੋਗੀ ਤੇ ਚੇਲੇ ਦੀ
ਆ ਦੇਖਿਏ ਲੜਾਈ ਸਾਪ ਨੇਵਲੇ ਦੀ
ਆ ਬਨਿਏ ਆਪਾ ਰੋਣਕ ਮੇਲੇ ਦੀ
ਆ ਲਇਏ ਚੀਜ ਖਰੀਦ ਧੇਲੇ ਦੀ
ਆ ਬਨਿਏ ਏਸ ਮੇਲੇ ਦੇ ਸਾਖੀ
ਮੂੱਕ ਗਈ ਕਣਕਾ ਦੀ ਰਾਖੀ
ਵੇ ਜੱਟਾ ਆਈ ਵਿਸਾਖੀ
असली भगवान
ये बड़े बुजुर्ग हमारे घर की शान है
इनसे समाज में बढ़ता सबका मान है
देते हैं सबको दुआएँ पोपले से मुंह से
तब ही तो घर में बिखरती मुस्कान है
बस इनसे है संभली घर की धरोहर
इनसे है विरासत ये अमूल्य खान है
आने वाली पीढ़ी को देते संस्कार है
बच्चों के भविष्य में इनका योगदान है
सुनाते है अपने अनुभव की कहानियाँ
सब बच्चों में बसती उनकी जान है
दुख देते हैं बड़ों को जो ढलती उम्र में
खुद के सुख को ठोकर मारते नादान है
उनकी खुशियों का रखना हमें ख्याल है
उनकी मुस्कान से बनती खुद की पहचान है
क्या करोगे मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे जाकर
इनको खुश रखो ये असली भगवान है