Sunday, 7 August 2022

वज़ूद

 शीर्षक :   वजूद 


कुछ  सवाल घेरे रहते हैं मुझको

जब भी कोई पूछता  है

 मुझसे  ही वजूद मेरा

हैरत में पड़ जाती  हूँ 

जब परिचय देते हुए बोलती हूँ

सिर्फ  एक  ही शब्द 

इंसान सिर्फ इंसान 

और अगला प्रश्न उछलता  है 

धर्म जात गोत्र कौन सी 

किसकी बहु बेटी हो किसकी

हर बार उलझा जाता है  ये प्रश्न मुझे

कभी कभी क्रोधित हो उठती हूँ

और कभी हँसी में टाल जाती हूँ

व्यथित हो उठती हूँ अक्सर 

इस तरह के सवालों से 

जो आंकते हैं कमतर 

हर उस औरत को 

जो ढूँढ रही है राह नई

बनाना चाहती है अस्तित्व

अपनी एक पहचान नई

पूछती हूँ मै आप सबसे 

क्या  जायज  नहीं है मेरा व्यथित होना

इन सब बातों पर

            

Thursday, 4 August 2022

कुछ पल उधार ले

 आ जिंदगी से कुछ पल उधार ले

फिर वो वक़्त साथ मेरे गुजार ले 


खो गया जो समय नासमझी में 

जी कर साथ जीवन को संवार ले


उलझ गई किसी धागे की मानिंद

सुलझा जिंदगी का एक एक तार ले


हर पल है एक नई जंग जिंदगी

कयूँ ना इसे आइने में उतार ले 


लौट  आए शायद बीता हुआ वक़्त

आओ मिलकर दिल से  पुकार ले


हसरत है अच्छा जीवन जीने की गर 

क्यों न वक़्त को वक़्त पर ही वार ले 


निकल आएगें इस तरह निराशा से

अगर  अंधेरे को उजालों से मार ले

Wednesday, 3 August 2022

दीवाने हो जाते हैं

 दीवाने हो जाते हैं

कैसे कुछ किस्से पुराने हो जाते हैं

 जब अपने लोग भी बेगाने हो जाते हैं


मची है पैसा कमाने की होड़ कुछ ऐसी 

अब अपनों से मिले ही जमाने हो जाते हैं


एक तुम्हें ही क्यों दोषी ठहराया जाए 

काम निकलने पर सब सयाने हो जाते हैं


पागल  ही होते हैं जाने क्यों कुछ लोग

पहली ही नजर में बस दीवाने हो जाते हैं


चली हैं जमाने में शक की हवाएँ इस तरह 

जरा सी बात पर खत्म अफसाने हो जाते हैं


कीमत समझते हैं जो लोग दोस्तों की 

वो उनके लिए अनमोल खज़ाने हो जाते हैं


साथ देते हैं जो बुरे वक़्त में किसी का 

जाने कब मीत वो अनजाने हो जाते हैं

Tuesday, 19 July 2022

सिला

 



                सिला

मेरी चाहतों का नहीं  सिला  मिला
जिंदगी भर सबसे ही गिला मिला

खार ही आए मेरे हिस्से में तो
कभी कोई फूल नहीं खिला मिला

सपनों के साथ उड़ना चाहा जब
रीति-रिवाज का खड़ा किला मिला

मरहम लगाती रही उम्रभर जिसपर
हर बार जख्म वही छिला मिला

नदिया की धार सी बह निकली
लाख राह में अड़ा शिला मिला

जब तराश  लिया वजूद  अपना
फिर नीलम को सारा विला मिला 

Saturday, 9 July 2022

गिले शिकवे

 गिले शिकवे

क्या दिन थे जब हम मिले थे

लगा हर जगह फूल खिले थे


बरसों रहा तेरा मेरा याराना

बरसों चले यही सिलसिले थे


याद है तुझे पाने का वो जनून

जाने कितने फतह किए किले थे 


खुश थे एक साथ रहकर हम 

चाहे एक दूसरे से बहुत गिले थे


कांटों की चुभन महसूस ना हो

खूबसूरती से ही लब सिले थे 


खार चुभ रहें हैं आज तो क्या

तेरी यादों  से ही जख्म छिले थे


धोखा दिया वक़्त ने ये कैसा

कभी तो हजारों रंग खिले थे

Monday, 4 July 2022

धड़कने लगा हूँ

 


           धड़कने लगा हूँ

तेरे सांसो की महक से महकने लगा हूँ मै
ए दिल  तू रोक ले मुझे बहकने लगा हूँ मैं

इस अंदाज से मत देख  मुझे महबूब मेरे
चाहतों की कसम तुझे चाहने लगा हूँ मैं

मुझसे दूर जाने की कोशिश करके देख ले
अब तेरे दिल में रहकर धड़कने लगा हूँ मै

राज पूछेगें सब तेरे चेहरे की मुस्कान का
तेरी परछाई बन साथ तेरे चलने लगा हूँ मै

ख्वाबों ख्यालों की जो ये दुनिया है तेरी
तेरे सपनों में साथ तेरे चहकने लगा हूँ मै

गवाही देगा पूनम का चाँद भी प्यार की
जो चौंध बन माथे तेरे चमकने लगा हूँ मै

रंग ये  तेरे बदन का बदल रहा है जो
बन ज्वाला  सी तुझमें दहकने लगा हूँ मै

नजरें गवाह है दिल में बसे इस प्यार की
काजल बन आँख में फड़कने लगा हूँ मै

आ बैठ पास मेरे आत्मसात हो जाए
नीलम कयूँ तेरे प्यार में भटकने लगा हूँ 

Tuesday, 28 June 2022

आँखे

 आँखे


कयूँ राज दिल के खोल गई आँखे

लब चुप रहे पर सब बोल गई आँखे


अश्क अभी ढलकने को ही था 

उसमें गम का वजन तोल गई आँखे


लब तो मशगूल रहे मुस्कुराने में

दर्द-ए-दिल की खोल पोल गई आँखे 


गलत नजरों ने जब देखा किसीने 

सबकी नजर में जहर सा घोल गई आँखे 


अंधेरों में जीने की आदत थी जिनको

मिली रोशनी तो बन अनमोल गई आँखे 


देखा किसी ओर को तड़पते हुए दर्द से

सीने में उठा दर्द और डोल गई आँखे 


मसला आया  इकरार और इसरार का

इश्क में बेवजह कर कलोल गई आँखे