गिले शिकवे
क्या दिन थे जब हम मिले थे
लगा हर जगह फूल खिले थे
बरसों रहा तेरा मेरा याराना
बरसों चले यही सिलसिले थे
याद है तुझे पाने का वो जनून
जाने कितने फतह किए किले थे
खुश थे एक साथ रहकर हम
चाहे एक दूसरे से बहुत गिले थे
कांटों की चुभन महसूस ना हो
खूबसूरती से ही लब सिले थे
खार चुभ रहें हैं आज तो क्या
तेरी यादों से ही जख्म छिले थे
धोखा दिया वक़्त ने ये कैसा
कभी तो हजारों रंग खिले थे