Thursday, 9 June 2022

किस्से वफा के

 वफा के किस्से सुनाने  लगी हूँ

खुद को ही आजमाने लगी हूँ


मोहब्बत  है अपनी तन्हाई से

प्यार के तराने गुनगुनाने लगी हूँ


गम नहीं साथ छोड़ने का ना जुदाई का 

खुद की पहचान बनाने लगी हूँ


खुद को देने सुकून के कुछ पल 

बैठ दरिया किनारे पैर भिगोने लगी हूँ


अतीत की परछाईयाँ ना आड़े आए

अपने गम भी इसमें बहाने लगी हूँ


मन में जमी मैल को हटाने लगी हूँ

खुद को प्यार से समझाने लगी हूँ


दिल के जख्म भर जाए जल्द ही

प्यार से खुद को सहलाने लगी हूँ

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