वफा के किस्से सुनाने लगी हूँ
खुद को ही आजमाने लगी हूँ
मोहब्बत है अपनी तन्हाई से
प्यार के तराने गुनगुनाने लगी हूँ
गम नहीं साथ छोड़ने का ना जुदाई का
खुद की पहचान बनाने लगी हूँ
खुद को देने सुकून के कुछ पल
बैठ दरिया किनारे पैर भिगोने लगी हूँ
अतीत की परछाईयाँ ना आड़े आए
अपने गम भी इसमें बहाने लगी हूँ
मन में जमी मैल को हटाने लगी हूँ
खुद को प्यार से समझाने लगी हूँ
दिल के जख्म भर जाए जल्द ही
प्यार से खुद को सहलाने लगी हूँ
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