Tuesday, 28 June 2022

आँखे

 आँखे


कयूँ राज दिल के खोल गई आँखे

लब चुप रहे पर सब बोल गई आँखे


अश्क अभी ढलकने को ही था 

उसमें गम का वजन तोल गई आँखे


लब तो मशगूल रहे मुस्कुराने में

दर्द-ए-दिल की खोल पोल गई आँखे 


गलत नजरों ने जब देखा किसीने 

सबकी नजर में जहर सा घोल गई आँखे 


अंधेरों में जीने की आदत थी जिनको

मिली रोशनी तो बन अनमोल गई आँखे 


देखा किसी ओर को तड़पते हुए दर्द से

सीने में उठा दर्द और डोल गई आँखे 


मसला आया  इकरार और इसरार का

इश्क में बेवजह कर कलोल गई आँखे

           

Thursday, 9 June 2022

किस्से वफा के

 वफा के किस्से सुनाने  लगी हूँ

खुद को ही आजमाने लगी हूँ


मोहब्बत  है अपनी तन्हाई से

प्यार के तराने गुनगुनाने लगी हूँ


गम नहीं साथ छोड़ने का ना जुदाई का 

खुद की पहचान बनाने लगी हूँ


खुद को देने सुकून के कुछ पल 

बैठ दरिया किनारे पैर भिगोने लगी हूँ


अतीत की परछाईयाँ ना आड़े आए

अपने गम भी इसमें बहाने लगी हूँ


मन में जमी मैल को हटाने लगी हूँ

खुद को प्यार से समझाने लगी हूँ


दिल के जख्म भर जाए जल्द ही

प्यार से खुद को सहलाने लगी हूँ

Saturday, 4 June 2022

कुछ लम्हें

 आए थे तुम जिंदगी में 

लिए सुकून के कुछ लम्हे

इन थोड़े से लम्हों को जीकर 

लगा जिंदगी छोटी नहीं है

जी उठे फिर से प्यार तेरा पाकर 

उधड़े से रिश्तों को सीकर 

थाम लिया दामन खुशियों का

जैसे कोई भौरां नाचे फूल पर 

फूलों का ही रस पीकर






Tuesday, 17 May 2022

कुछ ख्वाहिशे

                              कुछ ख्वाहिशे


जब भी  निहारती हूँ आसमाँ को
बन उन्मुक्त पंछी  गगन को  छूना चाहती हूँ
घिर आए काले बादलों को देख
बन पानी की बूंद उसमें समाना  चाहती हूँ
एकसार बहते समुद्र को देख
पानी की बूंद सा गिर सीप बन जाना चाहती हूँ
अनजान सी राहों पर चलकर
अपने पैरों के निशान छोड़ना चाहती हूँ
औरत मर्द के भेदभाव को मिटा
इंसानियत से इंसान की पहचान चाहती हूँ
रात के अंधेरे में कहीं भी बैठ
कुछ देर  दिल खोलकर हँसना चाहती हूँ
मुरझाए हुए दागदार चेहरे को
घंटो दर्पण में खुद को निहारना चाहती हूँ
लाख कमियाँ होगी मुझमें
उनसे इतर खुद को तराशना  चाहती हूँ
पकड़ ली है नई पगडंडी मैनें
सब कुछ छोड़कर खुद को तलाशना चाहती हूँ
असमंजस सी में है नीलम
पूछती हूँ खुद से क्या कुछ गलत तो नही चाहती हूँ


Monday, 9 May 2022

बात करते है

 


            बात करते है

बैठ मेरे पास कुछ राज की बात करते है
ए जिन्दगी तेरे मिजाज की बात करते है

ढूँढनी  चाही  थी जब महक फूलों की
मिले जो खार उसकी ही बात करते है

चलना चाहा जब जाने पहचाने रास्ते पर
तेरी दिखाई अनजान डगर की बात करते है

माना रास्ता लम्बा था संघर्ष से भरा हुआ
चल छोड़ खुशी से मंजिल की बात करते है

राह में कौन मिला बिछड़ा जाने दो सब
जिसने साथ निभाया उसकी बात करते है

किसने हँसी उड़ाई किसने जख्म दिए
चल मरहम लगाने वाले की बात करते है

कयूँ रखे आँख से निकले आँसू का हिसाब
लब पर बिखरी मुस्कान की बात करते है

कुछ हसरते तो सबकी अधूरी रहती है
हम तो जो पुरी हुई उनकी बात करते है

रोने वाले को ही  ओर भी रुलाती है
ये दुनिया जिसकी हम सब बात करते है

चलो भूल जाते है अतीत के दिए दर्द को
बस आज के सुख की नीलम बात करते है
                    

Wednesday, 27 April 2022

शिद्दत

 मेरे सीने में उठा दर्द तेरे चेहरे पर उभर आया

चाहत की शिद्दत से फिर जता भी नही पाया
अब लोग मुझसे तेरे गम की बात पूछते है
तेरी रूसवाई के डर से बता भी नही पाया

Wednesday, 20 April 2022

शब्द

                शब्द

शब्दों की भी अपनी अलग शान है
कहने को लगते निर्जीव से  है
पर शब्दों में  बड़ी जान है
कई शब्द होते है  ऐसे 
जिनमें समाया सारा जहान है
जादू से होते है कुछ शब्द
दुखी चेहरे की बनते मुस्कान है
कुछ करके अलग शब्दों का इस्तेमाल
समाज में बनाते अलग अपनी  पहचान है
कुछ शब्द होते है ऊर्जावान
जगा देते दबे हुए अरमान है
कुछ शब्दों में छिपी होती है प्रेरणा
वो देते सपनों को नई उड़ान है
शब्द ही बिठाते तख्तो ताज पर
कभी दिलाते कफन का सामान है
मिश्री सी घोलते हैं कभी कान में
कभी बजाते ना भूलने वाली तान है
शब्दों का चयन कैसे करना है
अब तो सिखाने के लिए खुल गए संस्थान है
सोच समझ कर बोला करो यारो
इन्हीं से जग में बनती हमारी पहचान है
शब्द चाहे तोड़ दो दिल ना किसी का तोड़ो
टूटे दिल को जोड़ना फिर नहीं आसान है
शब्द टूटकर नए अर्थ में बदल जाते है
नए अर्थ से रचते इतिहास  महान है