Babasta-e-Zindagi
Wednesday, 27 April 2022
शिद्दत
मेरे सीने में उठा दर्द तेरे चेहरे पर उभर आया
चाहत की शिद्दत से फिर जता भी नही पाया
अब लोग मुझसे तेरे गम की बात पूछते है
तेरी रूसवाई के डर से बता भी नही पाया
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