बिछड़ कर
उसके जाने के बाद पैगाम आने लगेकयूँ यादों के साथ सलाम आने लगे
बिखर गए थे जो मोती कभी टूटकर
वो माला बनाने के काम आने लगे
छोड़ आए थे जिन्हें किसी मोड़ पर
जुबां पर उनके ही नाम आने लगे
खुश हुए थे कभी जिनकी वजह से
याद वो किस्से पुराने तमाम आने लगे
रूक गई थी जो जिन्दगी किसी के लिए
रूकी सी जिन्दगी में नए मुकाम आने लगे
बीता दी उम्र जिसको तन्हाई में याद करके
उसके जाने पर इश्क के इल्जाम आने लगे
चाहा था कभी जिसे दिल की गहराई से
गए तो पीर फकीर याद सब धाम आने लगे
कट रही है जिन्दगी पुरानी यादों के सहारे
नीलम बिछड़ कर जीने केअंजाम आने लगे