मजबूर हो गए
तुझ से दूर होकर खुद से ही दूर हो गए
कयूँ अपनी चाहतों से ही मजबूर हो गए
ना तुझे बेवफा कह सके ना खुद को
वक्त के ढाए सितम से ही चूर हो गए
हर दम ही रहते थे जो नजरों के सामने
वो किसी ओर की आँख का नूर हो गए
बंद कमरे में हुई थी फक्त चंद मुलाकातें
जमाने में जाने कैसे किस्से मशहूर हो गए
नीलम तो आज भी सलामती चाहती है
क्या हुआ गर आज तुम मगरूर हो गए
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