Friday, 25 June 2021

नमी सी है

 होठों पर मुस्कान आँख में नमी सी है

सब कुछ होते हुए भी कुछ कमी सी है
अनजान राह पर बनाने थे निशान
मंज़िल पाकर भी खिसकी जमीं सी है 

No comments:

Post a Comment