Monday, 24 May 2021

लाचार रहा होगा

              लाचार रहा होगा


ना हिन्दु ना मुसलमान रहा होगा
कितना अपमानित लाचार रहा होगा

बहाई होगी लाश जब गंगा में यूँ ही
याद तो हर रस्म दाह संस्कार रहा होगा

सोचा होगा दो गज जमीन के लिए
पास ना कोई दोस्त मददगार रहा होगा

कहाँ से इंतजाम करता लकड़ियों का
पास में पैसा ना रिश्तेदार रहा होगा

सब कुछ हो जाने के बाद बहाए दो आँसू
अपनी नाकामी पर छीछालेदर रहा होगा

कैसे लोग भूल पाएँगे पीड़ा दुख अपनो का
नीलम समझ खुद को खाकसार रहा होगा



















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