Wednesday, 26 October 2022

जीने का बहाना

        जीने का बहाना


जाते हुए जीने का बहाना दे गया
दोस्त अपना  प्यारा पुराना दे गया

राज़दार  रहा था जो हम दोनों का
दोस्ती का  वो भरपूर खजाना दे गया

नहीं तो बहते ही रहते आँख से आँसू
लबों पर हँसी का ऐसा  बहाना दे गया

जात पात से ऊपर ही रखना दोस्ती को
लोगों को परखने का अलग पैमाना दे गया

वैसे ही किस्सों में  चल रही थी जिन्दगी
एक नई कहानी नया अफ़साना दे गया

बहुत  से अनमोल तोहफे दिए तुमने
दोस्ती के नाम पर ये कैसा नज़राना दे गया

भूलकर मुझे नई दुनिया बसा लि तुमने तो
जाते हुए मुझे रहने का ठिकाना दे गया 

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