जीने का बहाना
जाते हुए जीने का बहाना दे गया
दोस्त अपना प्यारा पुराना दे गया
राज़दार रहा था जो हम दोनों का
दोस्ती का वो भरपूर खजाना दे गया
नहीं तो बहते ही रहते आँख से आँसू
लबों पर हँसी का ऐसा बहाना दे गया
जात पात से ऊपर ही रखना दोस्ती को
लोगों को परखने का अलग पैमाना दे गया
वैसे ही किस्सों में चल रही थी जिन्दगी
एक नई कहानी नया अफ़साना दे गया
बहुत से अनमोल तोहफे दिए तुमने
दोस्ती के नाम पर ये कैसा नज़राना दे गया
भूलकर मुझे नई दुनिया बसा लि तुमने तो
जाते हुए मुझे रहने का ठिकाना दे गया
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