Monday, 26 May 2025

गज़ल 18

 

    
2122     2 122          2122    212
1ख़ूबसूरत भूमि प्यारी ढाल बननी चाहिए
हर सुबह हो खास शबनम ताल बननी चाहिए                   

2.छोड़ नफरत कुछ नही हासिल नया होना तुझे
ढेर  दुश्मन की ये धीमी चाल बननी चाहिए
                            
3 छोड़ दे लालच बशर जीने दे सब को अब यहाँ
गम की   लंबी रात अब खुशहाल बननी चाहिए                
4.बीज बोएं प्यार का पर्यावरण को साफ रख
खूबसूरत धरा प्यारी ढाल बननी चाहिए
5 चल लगाएं पेड़ हरियाली यूँ चारों ओर हो
बारिशों से   झूमती हर  डाल बननी चाहिए

6 खूबियाँ नीलम मुबारक हो तुझे बचपन की सब
जिंदगी में  अब ये सुर लय  ताल बननी चाहिए
 

Saturday, 17 May 2025

गज़ल 17


 


212        2   12    12  22


1अब तपिश ने किया इशारा है
चढ़ रहा रोज फिर से पारा है

2.मौसमी बारिशों के आने से
देखने को मिला नजारा है

3. बांटने की करो न कोशिश अब
नाज यूँ हिन्द पर हमारा है

4 मत सहारा लो झूठ का देखो
सच के आगे ये झूठ हारा है

5.साथ दे जो मदद करे सबकी
बस रहे उस का ही सहारा है

6 दम नही जो मिटा दे हस्ती को
खुद को मिट मिट के ही सॅंवारा है

7 नील डरती नहीं चुनौती से

उसका संघर्ष ही तो नारा है

Monday, 5 May 2025

गज़ल 16


 

गज़ल 16

2122     2 122          2122    212


1.जात पर कोई नहीं तकरार होनी चाहिए
एक भारत एक ही  हुंकार होनी चाहिए

2. आग तो सबको बुझानी ही पड़ेगी एक दिन
जो बदल दे सोच वो सरकार होनी चाहिए

3.भावना तो देश भक्ति की सदा कायम रहे
     साजिशों के दौर से इनकार होनी चाहिए


4  जो जिहादी हैं हमारे देश में करते फसाद
     उनके सीने में तो गोली पार होनी चाहिए
 
5. हक बराबर का अगर देता है सबको संविधान
   फिर न कोई मजहबी दीवार होनी चाहिए

6.देश को जो तोड़ते उनमें रहे डर मौत का
  हो सजा ऎसी कि हाहाकार होनी चाहिए

7  फायदा कुछ भी नहीं है भोथरी तलवार से
  जो रखो तलवार उसमें धार होनी चाहिए


8. देश सब का है अमन कायम रखना सभी
बेवजह नीलम न कोई  खार होनी चाहिए




                   

Wednesday, 30 April 2025

गज़ल 15

 

गज़ल 15
122  122          122  12

1. खुदा तुझ से आती इनायत  रही
हमेशा से फिर भी  शिकायत रही

2.भटकते है इंसाफ को लोग अब
कहीं बिक हमारी  सियासत रही

3.लगे फैसला करने जो न्याय का
नही उन में कोई लियाक़त रही

4.बहाता रहा जो पसीना बशर
मिली उस को फिर भी हिकारत रही

5 दिखाता रहा राह सपनों की जो
उसी बाप से ही  खिलाफत रही

6 करे दान  संपत्ति  का 'नील' जो
उसी के ही हाथों नियामत रही

Tuesday, 22 April 2025

धरती और आसमां

 

   धरती और आसमां
आहें तो उन पक्षियों ने भी भरी होगी
जब हमने काट दिए पेड़
गिरा दिए  गए उनके घोंसले
वहाँ पर पड़े हुए उन पक्षियों के अंडे
अंडों को सेने की उम्मीद में
लौटे होंगे घोंसले की तरफ
गिरा घोंसला कटा पेड़ देख
उनके दिल पर क्या बीती होगी
फिर शायद समझौता कर लिया
उन  पक्षियों ने भी
बचाने को अपनी प्रजाति
बेशर्मी से घुस आए हमारे ही घर में
या शायद जुड़ा होगा नाता उनका
उस जमीन से भी कुछ
उस आसमान से भी
इसी खुश फैहमी  में शायद
चहकते फिरते हैं पंछी भी
जमीं ना सही आसमां तो अपना है
चल रही है कशमकश अभी भी
उनके मनरेगा में
और इंसान सोच रहा है
हथियाने को आसमां
    22.4.25

Sunday, 6 April 2025

12 गज़ल



 

12 . गज़ल


1222   1222  1  2     22  1222


1. मुहब्बत हो गई उनसे तो फिर तकरार क्या करना
झगड़ना इश्क में शिकवे गिले  बेकार क्या करना।


2.बगीचे में उगाये आपने फूलों को मेहनत से
तो उन फूलों का यूँ बाजार में व्यापार क्या करना


3 कभी  थी भीड़ का हिस्सा  अकेली हो गई अब तो
मगर हिम्मत नही हारी है बन लाचार क्या करना


4 सफेदी सी उतर आई है जो बालों में अब मेरे
शिकायत भी खुदा से ना रही अब यार क्या करना


5.है रोशन जिंदगी उस चांद से पहलू में बैठा जो
झरोखे से दिखे उस चांद का दीदार क्या करना


6.दिवाली ईद दोनों को मनाएं प्यार से मिलकर
करें नीलम दुआएँ  यूँ वतन   बेजार क्या करना

Saturday, 29 March 2025

14 गज़ल

 

14 गज़ल
2212     2      212         2212   

 
1.यादों में वीरों को बसाया जाए अब
इति हास बच्चों को बताया जाए अब


2. माटी गए मिल जो बचाने देश को
  सिर ताज उनके भी  सजाया जाए अब


3 नारा भगत का भर दे  सब में जोश ये
ऐसा चलन  कोई  चलाया जाए अब


4 विस्मृत हुये वे सब लड़े दुश्मन से जो
कुछ नाम उन का दोहराया जाए अब


5.फांसी का फंदा चूम जो कुर्बां हुए
टीका शहादत का लगाया जाए अब


6.हर दम ही वंदे मातरम का गीत ये
मस्ती में माँ की गुनगुनाया जाए अब



7.भारत नही कमजोर हस्ती मिट सके
जज्बा युवाओं में जगाया जाए अब