तेरे नाम से जो धड़कने लगा है दिल
अब तो लगे ना मन कहीं आकर मिल
वही धूंधली सी शाम और तेरा साथ हो
वक़्त के दिए जख्मों को आकर सिल
तेरे नाम से जो धड़कने लगा है दिल
अब तो लगे ना मन कहीं आकर मिल
वही धूंधली सी शाम और तेरा साथ हो
वक़्त के दिए जख्मों को आकर सिल
सुख नहींं ठहरे तो दुख की बिसात क्या
गिरा दें मनोबल ऐसी इनकी औकात क्या
जैसा जीवन मिला है उसी में मुस्कुराना
रब की रजा में रहना नहींं है सौगात क्या
जो बात दिल में रह गई
वो बात आंख कह गई
किया इंतजार रहबर तेरा
फिर रात विरह में ढह गई
शब भर गीला रहा तकिया
यूँ रात में सिसकी बह गई
दिनभर धूप में अठखेलियाँ करता रहा
समंदर की लहरों से बहता हुआ पानी
रात को चाॅंद की मद्दम सी रोशनी में
किसकी याद में दिखा खोया हुआ पानी
खुद के लिए थोड़ा सा सूकून ढ़ूंढ़
जीने के लिए थोड़ा सा जूनून ढ़ूंढ़
इतना भी मुश्किल नही है खुश रहना
बस अपने जैसे दोस्तों का हुजूम ढ़ूंढ़
निकल जा कभी अनछुई सी जगह पर
देवदार के घने पेड़ों के बीच सुरूर ढ़ूंढ़
वक़्त में खो जाता है प्यार अकसर ही
खुद में जिंदा रखने के लिए वो नुपूर ढ़ूंढ़
जो चला गया उसे दुआ दे खुश रहने की
खुद को खुश रखने के लिए नया तुरूप ढ़ूंढ़
समंदर की लहरों में बैठ शांति से दो घड़ी
प्यार को याद कर क्षितिज का सुदूर ढ़ूंढ़
खोए हुए वक़्त की याद में ना बरबाद कर
खुद की खुशी के लिए नीलम हुज़ूर ढ़ूंढ़
तेरे जाने के बाद याद आई बातें तेरी
वह हसीन मंजर और मुलाकातें तेरी
खुश रखने का अलग वो अंदाज तेरा
रुठ जाने पर नएअंदाज से मनाना तेरा
आशिकी आंखों की और चाहतें तेरी
बिखरी हुई सी जिंदगी को समेटना तेरा
छोटी छोटी खुशियों को सहेजना तेरा
कैसे भूल सकती हूँ दी वो राहतें तेरी
बहुत कम समय मेरे साथ रहना तेरा
खामोश लबों से बहुत कुछ कहना तेरा
याद आती हैं आंखों की शरारतें तेरी
तेरे जाने के बाद याद आई बातें तेरी
वह हसीन मंजर और मुलाकातें तेरी
गाँव आए हैं
देखने फिर से अपना गाँव आए हैं।
सहेजने कुछ पुरानी याद आए हैं।।
शहरों ने दी रोजी रोटी बहुत कुछ।
लेने खाने में तृप्ति, स्वाद आए हैं।।
थका दिया भागमभाग जिंदगी ने।
गाँव में लेने सूकून की छांव आए हैं।।
शहर की आपाधापी में उलझ गया था।
जिंदगी में ना जाने कितने घाव खाए हैं।।
बुड्ढा हो गया था वक्त से पहले नीलम।
अपनों से चेहरे पर नए हावभाव आए हैं।।