Tuesday, 7 October 2025

गज़ल 22

 



122    122     122   12

तेरी याद में बुत बनाउंगा मैं
उसी बुत से घर को सजाऊंगा मैं

उधारी बढ़ी है कमाई घटी
रखा कर्ज लेकिन चुकाऊंगा मैं

अभी तक  मैं बेघर  गली में रहा
किसी दिल में इक घर बसाऊंगा मैं

जिन्होंने अभी तक दिया है दग़ा
उन्हीं को गले से लगाऊंगा मैं

लिखा था कभी ख़त उसे प्यार से
जुदाई पे सबको पढ़ाऊंगा मैं

तेरी याद में बुत बनाउंगा मैं
उसी बुत से घर को सजाऊंगा मैं
         

Wednesday, 1 October 2025

तुम ही तो

 






.बसाया था जिसे सपनों में मैंने तुम ही तो थे ना
उठाए थे कभी नखरे  हमारे भी   तुम ही तो थे ना
2.नयामत जिंदगी बनती हमारी साथ चलने से
किया आसान मुश्किल राह को वो  तुम ही तो थे ना
3.धर्म हथियार बन ठगता रहा सदियों से लोगों को

हवा नफरत की फैलाने में माहिर तुम ही तो थे ना
4.शिकारी जाल फैला कर पकड़ता मीन समुद्र में
जहाजों में चढ़ा निर्यात वाले तुम ही तो थे ना

5दिवस हिन्दी मना तौहीन करते रोज़ इस की भी
बधाई अंग्रेजी में यूँ देते तुम ही तो थे ना


Monday, 29 September 2025

गज़ल 21

 

         


122    122    12 2   122


हवा चल रही फल  को बिखरा रहे हैं
गरीबों के बच्चों  को तरसा रहे हैं


दिया प्यार बेइंतहा जिन्दगी ने
उसी प्यार में खुद को बहका रहे हैं


परायी हूँ पर मान है दो घरों में
उसी मान से घर को महका रहे हैं


ठहर ही गए हैं  किसी रेत पर गम
जमीं पर नमी अब ये फिसला रहे हैं


कदम बढ़ चले तुझ से मिलने को नीलम
अना तेरी तुझको ही भटका रहे हैं


Saturday, 6 September 2025

हौसले

 






बहुत वेग से आता है पानी

 एक झटके में ही 

बहा कर ले जाता है सब कुछ 

पर कहां बहा कर ले जा पाता है 

इंसान के हौसले उसकी उम्मीदें 

जो कभी देखते हैं आसमान की ओर 

कभी देखते हैं  मदद के लिए

बढ़ रहे  मजबूत हाथों की  तरफ

जो भर देती है उनमें

 फिर से जीने का हौसला 

मजबूत कर देती है उनके कदम 

जैसे एक तीली माचिस से रगड़ खाकर  आग उत्पन्न करती है 

ऐसे ही एक कमजोर हाथ को 

जब मजबूत हाथ का सहारा मिलता है 

 तो वो मजबूत कदमों से 

पानी में से  

 सूखी जमीन पर कदम रखते हुए

हौसलों की उड़ान पर सवार हो

रब की मरजी को तरजीह दे

सपनों के बीज बोने लगता है 

फिर से नई उम्मीदों के साथ 

 

Tuesday, 2 September 2025

20 गज़ल

 



 ये दोस्ती रहेगी यही तय हुआ था
बिछड़ना नही अब यही तय हुआ था



दिखे रंग कोई भी हम खुश रहें गे
लियाक़त रखेंगे यही तय हुआ था

.युवाओं   नशा छोड़ दो साथ  हम हैं
दिखाना है जज्बा  यही तय हुआ था

फरिश्ता नहीं अब बनाना किसी को
मसीहा बनेंगे  यही तय हुआ था

भटकना  जरुरी है क्या राह से यूँ
नई राह खोजें यही तय हुआ था

Friday, 8 August 2025

ਰੱਖੜੀ ਦਾ ਤਿਉਹਾਰ

 ਰੱਖੜੀ ਦਾ ਤਿਉਹਾਰ 



ਭੈਣ ਭਰਾ ਦੇ ਰਿਸ਼ਤੇ ਦਾ ਪਿਆਰਾ

ਤਿਓਹਾਰ ਹੈ ਏ ਸਬਤੋ ਨਿਆਰਾ 

ਸਾਲ ਭੱਰ ਇੰਤਜ਼ਾਰ ਰਹਿੰਦਾ 

ਏ ਧਾਗਾ ਕਰ ਜਾਂਦਾ ਪਿਆਰ ਗਹਰਾ 

ਕਰ ਤਿਲਕ ਜਦ ਬੱਨਦੀ ਰੱਖੜੀ  ਭੈਣ 

ਹਾਥ ਸਿਰ ਤੇ ਰੱਖ ਭਰਾਂ ਬਣਦਾ ਸਹਾਰਾ

ਜਦੋਂ ਵੀ ਕਿਸੇ ਦੂਖ ਨੇ ਪਾਇਆ ਘੇਰਾ

ਉਸ ਵੇਲੇ ਮੈਂ  ਤੇਰੇ  ਨਾਮ ਦਾ ਲਾਇਆ ਬੂਲਾਰਾ 

ਬਚਪਨ ਤੋਂ ਜਵਾਨੀ ਤਕ ਦਿੱਤਾ ਸਾਥ

ਪਲਭਰ ਦਾ ਵਿਛੋੜਾ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਸੀ ਗਵਾਰਾ 

ਵਿਆਹ ਤੋ ਬਾਦ ਅੱਡ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਨੇ ਘੱਰ 

ਛੁਟਦਾ ਨਹੀ ਢੇਰ ਵੀ ਏ ਸਾਥ ਪਿਆਰਾ 

ਬੱਡਦੇ ਨੇ ਦੁਖ ਸੂਖ ਰਹਿੰਦੀ ਜਿੰਦਗੀ ਤਕ

ਨਿਭਾਉਂਦੇ ਨੇ ਸਾਥ ਜਿੰਵੇ ਚੰਦ ਤੇ ਤਾਰਾ 

           

Wednesday, 9 July 2025

गज़ल 19

 


2122   2122   212 2   212



1.मोह के धागे पिरोना चाहती हूँ हार में
डूब जाऊँ टूट कर चाहूँ तुझे ही प्यार में

2.चाह कर होता नही विश्वास नेता पर कभी
लोग धोखा दे रहे हैं बैठ कर सरकार में

3.रह  न पाऊँगी अकेले तेरे बिन ऐ हमसफर
छोड़कर जाना नहीं मुझको कभी मझधार में

4.यूँ सताना छोड़ भी दो बेवजह हम को  सनम
जिंदगी की लौ न बुझ जाए इसी तकरार में

5कितना मुश्किल है बचाना दोस्त अपने आप को
हर जगह हैं भेड़िये इन्सान के किरदार में

6 शोख है अंदाज उनका राज ये नीलम समझ
झेलनी कोई मुसीबत ना पड़े बेकार में