Sunday, 6 April 2025

12 गज़ल



 

12 . गज़ल


1222   1222  1  2     22  1222


1. मुहब्बत हो गई उनसे तो फिर तकरार क्या करना
झगड़ना इश्क में शिकवे गिले  बेकार क्या करना।


2.बगीचे में उगाये आपने फूलों को मेहनत से
तो उन फूलों का यूँ बाजार में व्यापार क्या करना


3 कभी  थी भीड़ का हिस्सा  अकेली हो गई अब तो
मगर हिम्मत नही हारी है बन लाचार क्या करना


4 सफेदी सी उतर आई है जो बालों में अब मेरे
शिकायत भी खुदा से ना रही अब यार क्या करना


5.है रोशन जिंदगी उस चांद से पहलू में बैठा जो
झरोखे से दिखे उस चांद का दीदार क्या करना


6.दिवाली ईद दोनों को मनाएं प्यार से मिलकर
करें नीलम दुआएँ  यूँ वतन   बेजार क्या करना

Saturday, 29 March 2025

14 गज़ल

 

14 गज़ल
2212     2      212         2212   

 
1.यादों में वीरों को बसाया जाए अब
इति हास बच्चों को बताया जाए अब


2. माटी गए मिल जो बचाने देश को
  सिर ताज उनके भी  सजाया जाए अब


3 नारा भगत का भर दे  सब में जोश ये
ऐसा चलन  कोई  चलाया जाए अब


4 विस्मृत हुये वे सब लड़े दुश्मन से जो
कुछ नाम उन का दोहराया जाए अब


5.फांसी का फंदा चूम जो कुर्बां हुए
टीका शहादत का लगाया जाए अब


6.हर दम ही वंदे मातरम का गीत ये
मस्ती में माँ की गुनगुनाया जाए अब



7.भारत नही कमजोर हस्ती मिट सके
जज्बा युवाओं में जगाया जाए अब

Wednesday, 19 March 2025

गज़ल 11

 

       गज़ल 11
2122  212  2 2122


1.वो जता पाया नहींं उसने कहा क्या
मैं कभी समझा नही  उसने कहा क्या

2.सब बताने की जरूरत क्या थी लब से
तल्खियाँ कह ही गई उसने कहा क्या

3.कह गई नजरें बताने को रहा क्या
वो छुपाता फिर कैसे उसने कहा क्या

4.क्यूँ करी नाराजगी जाहिर तुझी से
सोहबत से खुश नहीं उसने कहा क्या

5.याद आती हैं तेरी कहानियाँ भी
छोड़ आई पास मेरे उसने कहा क्या

6.हो जुदा तुमसे मुझे भी कहना है कुछ
चाहती है वो मुझे उसने कहा क्या

7. फूल कैक्टस का मुझे प्यारा लगे है
प्यार उसको था कभी उसने कहा क्या
   



Thursday, 13 March 2025

13 गज़ल

 

2122   121


  2  22
   
       13. गज़ल
आ लगा जा गुलाल होली में
कर दे रंगीन गाल  होली में

संग तेरे कभी ना रह पाई
बस यही है मलाल होली में 

मुश्किलों छोड़ दो दमन करना
  मरना    जीना मुहाल होली में

बन रही टोलियाँ युवाओं की
आ गया है उबाल होली में

प्यार के रंग में उसने रंग के मुझे
कर दिया है निहाल होली में
        
  

Friday, 7 March 2025

डर

 



         डर
कई बार मैं डर जाती हूं
जब बेटी को देखती हूं
खिलखिला कर हंसते हुए
कहकहे लगाते हुए
उसको स्पष्टता से बेबाकी से
अपनी बात कहते हुए
देर रात दोस्तों के साथ घूमते हुए
ठीक को ठीक गलत को गलत कहते हुए अपनी ठीक बात  पर कायम रहते हुए फिर सोचती हूं
मैं भी तो यही कुछ करना चाहती थी अपनी जवानी में
लेकिन मुझे डरा दिया गया
समाज के नाम से
रीति रिवाज के बंधनों से
मां-बाप की इज्जत के नाम पर
और मैं डर गई
समेट लिया मैंने अपने आप को
अब मैंने सोचा
बेटी को नहीं डराऊंगी
वह जो करना चाहेगी
मैं उसके साथ ही खड़ी नजर आऊंगी

Tuesday, 25 February 2025

10. गज़ल



 10. गज़ल


122  122    122    122    

                      


1.रुलाने से अच्छा खफा  छोड़ जाते
तसल्ली तो होती वफा छोड़ जाते


2. तुझे देखती दूर तक अलविदा कह
मुड़े जो गली से हया छोड़ जाते


3. हमेशा मुझी से शिकायत की तुमने
    जुदाई से पहले खुशी छोड़ जाते


4.ये दीपावली रोशनी का है उत्सव
खुशी के लिए एक दिया छोड़ जाते


5.पुराने जमाने से अच्छा समा है
कहानी में फिर कुछ नया छोड़ जाते


6. किया इश्क़ चाहा दिलोजान से यूँ
निभाते नहीं तो जहाँ छोड़ जाते

Sunday, 16 February 2025

9 गज़ल

           गज़ल


माना मिले थे हम कभी अनजान की तरह
तुमको करुं यूं याद मैं भगवान की तरह


लिखना तो चाहते हैं गरीबों पे लोग सब
माना नही विचारते इंसान की तरह


ना चाहते हुए भी    भरोसा रहा मेरा
जैसे मिली उसे फिर वरदान की तरह


आंसू बता रहे हैं कहानी ये रात की
बीती है जिन्दगी तेरी अहसान की तरह


मंशा नही थी  दुख यूं जताने की मेरी भी
चाहा है उस को मैंने  दिलोजान की तरह


वादे पे जिसके मैंने भरोसा किया है अब
धोखा मिला उसी से है शैतान की तरह