Sunday, 16 February 2025

9 गज़ल

           गज़ल


माना मिले थे हम कभी अनजान की तरह
तुमको करुं यूं याद मैं भगवान की तरह


लिखना तो चाहते हैं गरीबों पे लोग सब
माना नही विचारते इंसान की तरह


ना चाहते हुए भी    भरोसा रहा मेरा
जैसे मिली उसे फिर वरदान की तरह


आंसू बता रहे हैं कहानी ये रात की
बीती है जिन्दगी तेरी अहसान की तरह


मंशा नही थी  दुख यूं जताने की मेरी भी
चाहा है उस को मैंने  दिलोजान की तरह


वादे पे जिसके मैंने भरोसा किया है अब
धोखा मिला उसी से है शैतान की तरह

Tuesday, 11 February 2025

8 गज़ल


 122     122     122    122

 किसी से  की कोई जलालत नहीं है 

खुदा से बड़ी  ये अदालत नही है


रखा कोई रिश्ता नहीं उन से जिनको

रही बोलने की लियाकत नहीं है 


परिंदा हूँ  कमज़ोर पर हैं  ये मेरे

  अभी उड़ने  की मुझमें ताकत नहीं है


समय की नजाकत को समझो जरा सी

मुकरने की वादे से आदत नही है


 गयी  लौट चेहरे मेरे की वो रौनक

 रही मुझमें अब वो नजाकत नहीं है


 शिकायत रखी ही ना  गैरों से नीलम

दी अपनों ने भी कोई  राहत  नही है

Wednesday, 5 February 2025

7. गज़ल

 


1222     1222          1222   1222

जियेंगे साथ हम दोनों अभी तो जज्बात  बाकी है।
करें हम मन की  बातें कुछ अभी तो रात बाकी है ।।
 दिए जो वक़्त ने जख्म उनसे झुक  गया हूँ 
मिली है जिंदगी से शह अभी ये मात बाकी है।।

 
 दिखाएं हैं तुझे दिलकश नजारे  जो मुहब्बत में।
इतर उनसे  सहन करना अभी ये घात बाकी है।।
लुटाना  चाहता था इश्क़ में सब कुछ तुम्हें अपना। 

मैं डरता हूँ बतानी जो अभी ये जात बाकी है।।

 
खड़े हैं संत दरवाजे पे रख उम्मीद खाने की।
खिलाऊं किस तरह उनको  बनाना जो अभी ये भात बाकी है।।

 
नवाजिश रुख है दरकार पानी की उसे नीलम
बचा ले सूखने से उसे  अभी तो पात बाकी है


Thursday, 30 January 2025

6 गज़ल

 

          6 गज़ल
122        122         122      122 
खलल तो डला पर  निकलते रहे हल
    वफा करने वाले  बदलते रहे दल

दुखों का रहा घेरा मेरे ही घर पर
     तेरे साथ जीकर गुजरते रहे पल

शज़र काट डाले क्यों फलदार हमने
जुदा हो शज़र से बिखरते रहे फल

ढका बादलों ने ही सूरज को ऐसे
बड़ी धुंध थी सब ठिठुरते रहे कल
 
यूँ मातम दुखों का न कर अब तू नीलम
तू कर इश्क़ रब से   महकते रहें पल
                         
                            

Tuesday, 21 January 2025

5. गज़ल

 

5. गज़ल
122  122    122 1 2
दिया दिल को धोखे का उपहार है
किया जो कपट  उस की ये हार है

बिगड़ने लगे बच्चे अब आजकल
नशा करता  बरबाद परिवार है

हमेशा जहाँ का नियम ये रहा
मिलन ओर जुदाई की दरकार है

वो रिश्ता हुआ  जी का  जंजाल ही
  बना दोगला जिस का किरदार है

ए नीलम चुनौती दे इस रीत को
बदल जाता लड़की का हकदार है





Monday, 20 January 2025

ਧੁੰਦਲੇ ਵਰਕੇ

 

     ਧੁੰਦਲੇ  ਵਰਕੇ 
ਕੁਝ ਵਰਕੇ ਪਾੜ ਦਿੱਤੇ ਨੇ
ਮੈਂ ਆਪਣੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੀ ਕਿਤਾਬ ਚੋਂ
ਜੋ ਕਰ ਰਹੇ ਸੀ ਮੈਨੂੰ ਪਰੇਸ਼ਾਨ
ਤੇ ਅੱਗੇ ਵਧਣ ਦੀ ਰਾਹ ਚ
ਬਣ ਰਹੇ ਸੀ ਰੋੜਾ
ਕੁਝ ਵਰਕੇ ਪੈ ਗਏ ਸੀ ਪੀਲੇ
ਸਾਰ ਨਹੀਂ ਰਹਿ ਗਿਆ ਸੀ ਕੋਈ
ਨਾ ਹੀ ਕੋਈ ਅਹਿਮੀਅਤ ਰਹਿ ਗਈ ਸੀ
ਇਸ ਵਾਸਤੇ ਪਾੜ ਕੇ ਸੁੱਟ ਦਿੱਤੇ
ਕੁਝ ਵਰਕੇ ਗਿੱਲੇ ਹੋ ਗਏ ਸੀ
ਵਕਤ ਦੇ ਦਿੱਤੇ ਹੰਝੂਆਂ ਨਾਲ
ਉਹ ਵੀ ਮੈਂ ਪਾੜ ਦਿੱਤੇ
ਭੁੱਲੇ वक़्त ਨੂੰ ਯਾਦ ਕਰਵਾ ਕੇ
ਝਾਕਦੇ ਸੀ ਹਰ ਵੇਲੇ ਕੋੜਾ ਕੋੜਾ
ਕੁਝ ਵਰਕੇ ਜੋ ਭਿੱਜੇ ਹੋਏ ਸੀ  ਚਾਸ਼ਨੀ ਦੇ
ਜਵਾਨੀ ਇਸ਼ਕ  ਤੇ ਬਚਪਨ ਦੀ ਨਾਦਾਨੀ ਦੇ
ਸੋਹਣੇ ਵਕਤ  ਨੂੰ ਕਰਵਾਉਂਦੇ ਸੀ ਯਾਦ
ਉਹ ਰੱਖ ਲਏ ਆਪ ਨੂੰ  ਖੁਸ਼ ਰੱਖਣ ਲਈ
ਹੱਸਦੇ ਸੀ ਮੈਨੂੰ ਦੇਖ ਕੇ ਥੋੜਾ ਥੋੜਾ
ਹੁਣ ਨਵੀਂ ਕਿਤਾਬ ਬਣਾਣੀ ਹੈ
ਪੁਰਾਣੀਆਂ ਸੋਹਣੀਆਂ ਯਾਦਾਂ ਨਾਲ
ਸਜੀ ਹੋਈ ਅਰਮਾਨਾ ਤੇ  ਖਵਾਈਸ਼ਾਂ ਨਾਲ
ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਨੂੰ ਖੁਸ਼ਨੁਮਾ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਆਸ ਤੇ
ਹਸਾਊਗੀ ਮੈਨੂੰ ਭੋਰਾ ਭੋਰਾ
ਏਸ ਲਈ ਕੁਝ ਵਰਕੇ ਪਾੜ ਦਿੱਤੇ ਨੇ
ਮੈਂ ਆਪਣੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੀ ਕਿਤਾਬ ਚੋਂ
    

Friday, 17 January 2025

4गज़ल

           गज़ल

गरीबी में पलकर बड़ा जो बनेगा
निसंदेह इंसाफ सबसे करेगा


निगाहें किसी की सदा दे रही है
जरा सोच तो  साथ कब तक चलेगा


गुजर तो रहे हैं गली से   यूँ उनकी   

 पता चलने पर क्या जमाना कहेगा


चले गाँव की ओर फिर घर संभाले
शहर में नही कोई किस्से सुनेगा


हमेशा  रखो उस खुदा पर भरोसा
परेशानियों से कहो दिन ढलेगा