Monday, 27 May 2024

अमलतास

        अमलतास

जेठ की तपती दुपहरी में

 सड़क के किनारे चलते हुए 

देख कर अमलतास के फूलों को

 गर्मी से कुम्लाहे चेहरे पर भी 

आ जाती है हल्की सी मुस्कान 

खिल उठता है मन भी 

तेरे सुनहरी फूलों की तरह

मन की मुस्कान के साथ-साथ 

उतर जाती है तन की थकावट भी

खड़े रहो ऐसे ही इस्तकबाल करते  हुए

Tuesday, 21 May 2024

ਚਾਹ

 ਕਲਿਆਂ ਬੈਠਕੇ ਚਾਹ ਪੀਤੀ ਤਾਂ ਕੀ ਪੀਤੀ

ਆਵਦੇ ਨਾਲ ਗੱਲ ਕੀਤੀ ਤਾਂ ਕੀ ਕੀਤੀ 

ਚਾਹ ਪੀਣ ਦਾ ਸਵਾਦ ਤਾਂ ਹੈ ਦੋਸਤਾਂ ਨਾਲ 

ਕੁਝ ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਸੁਨੀ ਤੇ ਆਵਦੀ ਕੀਤੀ 


 


Wednesday, 8 May 2024

पत्थर की पीड़ा

 

साहिल के किनारे बैठ
हवा संग आती जाती
लहरों को ताकना
नहीं है मकसद मेरा
मैं पीड़ा जानना चाहती हूं
उन पत्थरों की भी जो  टूटते रहते हैं
छोटे-छोटे टुकड़ों में
बनते रहते हैं हिस्सा
अविरल बहते समुद्र का
अपनी पहचान गवा कर

Sunday, 28 April 2024

इच्छाएँ

 

चांद के आकार की तरह
घटती बढ़ती इच्छाएं
कभी पूर्णमासी के चांद सी
परिपूर्ण
कभी अमावस के
चांद सी  निल
कभी ढेर सारी
और कभी एक आध
जिंदगी के साथ
कदमताल करती हुई

Thursday, 18 April 2024

हाल मेरे गाम का

 

मेरे गाम का के हाल तू बुझै सै रै भाई
ऐकले पड़ रहे है इते सारे  लोग लुगाई

अनपढ़ करे सै मजूरी सहर मै जाके
पढ़े लिखे नै तो  ब्याज मै जमीन गवाई

पुरखिया की जमीन  बंट गई आपस में
जिसके खातर करै कचहरी और लड़ाई

बीतै भर का खेत आ गया सबकै हिस्से में
कित बोवैं फसल अर किस की करै कटाई

गुजारे लायक भी फसल जद ना देंवे खेत
के करै शहर में जाकर ना करै गर कमाई

Wednesday, 17 April 2024

ਕਦੇ ਕਿਵੇਂ ਕਦੇ ਕਿਵੇਂ

 ਮੇਰੀ ਹੋਂਦ ਤੇ ਸਵਾਲ ਖੜੇ ਕੀਤੇ ਕਦੇ ਕਿਵੇਂ ਕਦੇ ਕਿਵੇਂ 

ਮੇਰਾ ਜੀਵਨ ਮੂਹਾਲ ਕੀਤਾ ਕਦੇ  ਕਿਵੇਂ ਕਦੇ ਕਿਵੇਂ


ਲੜ ਤੇਰੇ ਲੱਗ ਛੱਡ ਦਿੱਤੀ ਦੇਹਰੀ ਪੇਕਿਆਂ ਦੀ 

ਪਰ ਸ਼ਕ ਦੇ ਘੇਰੇ 'ਚ ਰਹੀ ਕਦੇ  ਕਿਵੇਂ ਕਦੇ ਕਿਵੇਂ


ਹਮਸਫ਼ਰ ਬੰਨ੍ਹ ਟੁਰਦੀ ਰਹੀ ਨਾਲ ਤੇਰੇ ਹਰ ਪਲ

ਜਿਉਣਾ ਛੱਡ ਜਿਊਦੀਂ ਰਹੀ ਕਦੇ  ਕਿਵੇਂ ਕਦੇ ਕਿਵੇਂ


ਹੂਣ ਜਦੋਂ ਸੋਚ ਲਿਆ ਤੇਰੇ ਤੋਂ ਵੱਖ ਹੋਕੇ ਜਿਉਣ ਦਾ

ਗੱਲਾ ਕਰਨ ਲੱਗ ਪਏ ਲੋਕ ਕਦੇ  ਕਿਵੇਂ ਕਦੇ ਕਿਵੇਂ


ਇਕ ਨਵਾਂ ਮੁਕਾਮ  ਤਾਂ ਹਾਸਲ ਕਰ ਹੀ ਲਉਂਗੀ 

ਛੱਡ ਪਰੇਸ਼ਾਨ ਹੋਨਾ  ਨੀਲਮ ਕਦੇ  ਕਿਵੇਂ ਕਦੇ ਕਿਵੇਂ


Sunday, 7 April 2024

दूरियाँ

 

कहीं सहरा में दफन कर दे मजबूरियां
रह दिल के पास मिटा दे यह सारी दूरियां

कहने सुनने को कितना अच्छा लगता है
पर क्या आसान है छोड़नी ये दुश्वारियां

गुस्सा गिला दुख अतीत परेशानी नाकामी
जिंदगी में साथ चलती रहती है ये रवानियां

क्यूँ छोड़ इनको आगे बढ़ नहींं पाते हम
चाहे हर कदम रंग दिखाती है पशेमानियां

खुद के अंदर जिंदा रख एक मासूम बच्चा
दे इजाजत करने की उसको  मनमानियाँ
        नीलम नारंग