Thursday, 25 January 2024

बातें तेरी

 तेरे जाने के बाद याद आई बातें तेरी 

वह हसीन मंजर और मुलाकातें तेरी


खुश रखने का अलग वो अंदाज तेरा

रुठ जाने पर नएअंदाज से मनाना तेरा 

आशिकी  आंखों की  और चाहतें तेरी 


बिखरी हुई सी जिंदगी को समेटना तेरा 

छोटी छोटी  खुशियों को सहेजना तेरा 

 कैसे भूल सकती हूँ  दी वो राहतें तेरी 


बहुत कम समय मेरे साथ रहना तेरा 

खामोश लबों से बहुत कुछ कहना तेरा 

 याद आती हैं आंखों की शरारतें तेरी 


तेरे जाने के बाद याद आई बातें तेरी 

वह हसीन मंजर और मुलाकातें तेरी

Thursday, 18 January 2024

याद आए हैं

 गाँव आए हैं

देखने फिर से अपना गाँव आए हैं। 

सहेजने कुछ पुरानी याद आए हैं।। 


शहरों ने दी रोजी रोटी बहुत कुछ। 

लेने खाने में तृप्ति, स्वाद आए हैं।। 


थका दिया भागमभाग जिंदगी ने। 

गाँव में लेने सूकून की छांव आए हैं।। 


शहर की आपाधापी में उलझ गया था। 

जिंदगी में ना जाने कितने घाव खाए हैं।। 


बुड्ढा हो गया था वक्त से पहले नीलम। 

अपनों से चेहरे पर नए हावभाव आए हैं।। 

                







Monday, 11 December 2023

हक की बात

 आ हासन की शुरुआत करै

ना ईब कोई गम की बात करै


छोड़ अट्ठा सारे गिले शिकवे

सांझा दिल के जज्बात करै


साच में साथ देवें इक दूजे का

झूठे संग गहरा प्रतिघात करै


इक दूजे गैल मिलकर रहवा सब

पैदा इस तरिहयां के हालात करै

 

दुख में साथ निभाएं इक दूजे का

दूर दिल से धर्म जात पात करै


प्रकृति ने जद  दिया सबनै बराबर

उसके दिए का सब सत्कार करै 


सब मानस राम नै बनाए एकसै

नीलम सबके हक की बात करै 



Tuesday, 28 November 2023

ਸਰਜਨਸ਼ੀਲ

 





ਔਰਤ ਬੜੀ ਸਰਜਨਸ਼ੀਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ

ਸਹੇਜ ਕੇ ਰਖਦੀ ਹੈ ਬਚਪਨ ਦੇ 

ਅਪਣੇ ਗੂਡਿਆਂ ਪਟੋਲੇ 

ਤੇ ਅਪਣੇ ਬਚਿਆ ਦੇ ਛੋਟੇ ਛੋਟੇ ਕੱਪੜੇ ਵੀ

ਸਹੇਜ ਲੈਂਦੀ ਹੈ 

 ਓਹਨਾਂ ਨਾਲ ਵੇਖੇ ਸੁਪਨਿਆਂ ਨੂੰ ਵੀ

ਜਦ ਵੀ ਦੂਖੀ ਜਾਂ ਨਿਰਾਸ਼ ਹੁੰਦੀ ਹਾਂ 

ਖੋਲਦੀ ਹੈ ਸੰਦੂਕ ਫਰੋਲ ਦੀ ਹੈ ਪੁਰਾਣਾ ਸਮਾਨ 

ਚੇਤੇ ਕਰਵਾਉਂਦੀ ਹੈ ਖੂਦ ਨੂੰ 

 ਓਸ ਦੇ ਵਿੱਚ ਸਹੇਜ ਕੇ ਰਖੇ ਸੁਪਨੇ 

ਕੂਝ ਸੁਪਨੇ ਵੰਡ ਦੀਦੀਂ ਹਾਂ ਧੀਆਂ ਪੂਤੱਰਾ ਚ 

ਕੂਝ ਨੂੰ ਫੇਰ ਸਹੇਜ ਲੈਂਦੀ ਹੈ 

ਅਪਣੀ ਵਦਧੀ ੳਮਰ ਨੂੰ ਦਰਕਿਨਾਰ ਕਰ 

ਪੂਰਾ ਕਰਣ ਦੀ ਆਸ ਤੇ 

ਹਰ ਔਰਤ ਸਹੇਜ ਲੈਂਦੀ ਹੈ

ਖੱਟਿਆ ਮਿਠਿਆ ਯਾਦਾਂ ਵੀ 

ਕਿਸੇ ਦਾ ਕੌੜਾ ਬਰਤਾਵ ਵੀ

ਕਿਸੇ ਦਾ ਚੰਗਾ ਸਵਭਾਵ ਵੀ

ਪਰ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਪਢੵਣ ਨਹੀਂ ਦੀਦੀ 

ਅਪਣੇ ਮਨ ਦੇ ਭਾਵ ਵੀ 

Tuesday, 21 November 2023

वफ़ा निभाने का

 तुझमें भी हुनर था दिल लगाने का

मुझे भी नशा था वफा निभाने का

 

फिर भी कयूँ रास्ते हो गये जुदा जुदा

शायद जज्बा नहीं था मनाने का


लोग खाते रहे कसमें हमारे इश्क़ की

हम इल्म ही भूल गए अपने फसाने का


जिस शिद्दत से शुरू हुई थी मुहब्बत

वो पहला लफ्ज़ ही खो गया तराने का 


आ फिर से महसूस करें पहली सी कसक

क्यूँ पाले भ्रम इक दुजे को भुलाने का


फिर से हवा दें बुझती हुई चिंगारी को

क्यूँ इंतजार करें इसके राख हो जाने का


आ एक मिसाल कायम करें साथ होकर

क्यूँ सोचे बीते वक़्त को आईना दिखाने का


तुझमें भी हुनर था दिल लगाने का

मुझे भी नशा था वफा निभाने का

Friday, 10 November 2023

मिट्टी के दीए

 


  मिट्टी के दीए

दीए की मिट्टी ने मिल मिट्टी में

फिर नयी मिट्टी बन जाना है 

इस दीए ने ना मुझे ना तुझे

ना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना है 

सारा साल कुम्हार करे इंतजार

इन दीयों के सहारे उसको घर चलाना है 

इस बार जला मिट्टी के दीए 

एक नया संदेश घर घर पहुँचाना है

ये है हमारा सबसे प्यारा त्यौहार

इसको पारम्परिक तरीके से ही मनाना है 

नीलम देती है संदेश सभी को 

इस दीवाली विदेशी लड़ियाँ  से नहीं मिट्टी के दीयों से दीवाली को मनाना है 

    


Tuesday, 7 November 2023

तेरे शहर में

 

       तेरे शहर में
तेरे शहर में आकर तेरे दीदार को तरसे
कैसे कहूँ हरदम ही तेरे प्यार को तरसे

घर अब ईंट पत्थर का सा मकान लगे
देखकर इसको पगले नैना यूँ ही बरसे

तेरी यादों के सहारे ही खुश रहना है
मिले हुए लगता है बीत गऐ हो अरसे

तुम क्या गए छोड़ कर मुझे मझधार में
छिन गया हो‌ आसमां  जैसे मेरे सर से
           नीलम नारंग