Tuesday, 21 November 2023

वफ़ा निभाने का

 तुझमें भी हुनर था दिल लगाने का

मुझे भी नशा था वफा निभाने का

 

फिर भी कयूँ रास्ते हो गये जुदा जुदा

शायद जज्बा नहीं था मनाने का


लोग खाते रहे कसमें हमारे इश्क़ की

हम इल्म ही भूल गए अपने फसाने का


जिस शिद्दत से शुरू हुई थी मुहब्बत

वो पहला लफ्ज़ ही खो गया तराने का 


आ फिर से महसूस करें पहली सी कसक

क्यूँ पाले भ्रम इक दुजे को भुलाने का


फिर से हवा दें बुझती हुई चिंगारी को

क्यूँ इंतजार करें इसके राख हो जाने का


आ एक मिसाल कायम करें साथ होकर

क्यूँ सोचे बीते वक़्त को आईना दिखाने का


तुझमें भी हुनर था दिल लगाने का

मुझे भी नशा था वफा निभाने का

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