Monday, 17 July 2023

ਹਰਫ਼

 ਜਦੋਂ ਭਾਵਨਾਵਾਂ ਦਾ ਸਮੁੰਦਰ

ਠਾਠੇ ਮਾਰਦਾ ਹੈ  ਅੰਦਰ

ਪੂਗਰਦੇੰ ਨੇ ਹਰਫ਼

ਜਿਵੇਂ ਬਹੁਤਾ ਗਰਮੀ ਚ

ਪੂਗਰਦੀ ਹੈ ਬਰਫ਼

Friday, 7 July 2023

अहसास

               अहसास

जब से दिल के अहसास मर गए। 

जिंदगी के पल सुकून से भर गए।। 


चलने लगे अपनी बनाई राह पर। 

जब निकल समाज के  डर गए।। 


खौफ नहीं मरने का अब यारो। 

खुद के लिए  कूच जहाँ कर गए।। 


राहों को  ही मंजिल बना लिया। 

लगा नहीं मुद्दत हो गई घर गए।। 


मरने के बाद भी सुकून रहेगा। 

वजूद अपना जिंदा छोड़ गर गए।। 


खुशियाँ छोड़ लगे रहे धन बटोरने। 

जो गए जहाँ से छोड़ सब जर गए।। 


चाहत थी आसमां में उड़ने की । 

नीलम की आस है चाहे कट पर गए।। 



Saturday, 1 July 2023

फलसफे

 


            फलसफे

फलसफे जिंदगी के चलते रहे हैं। 

हरदम अलग रंग बिखरते रहे हैं।। 


ढ़ूंढ़नी चाही जब जब खुशियाँ। 

हर बार अलग पल दिखते रहे हैं।। 


कैसे बांधू जिंदगी तुझे लफ़्ज़ों में। 

उम्र के साथ सपने बदलते रहे हैं ।। 


 खुशी ठहरी ना गम को पनाह मिली। 

दोनों एक दूसरे से ही बिछड़ते रहे हैं।। 


मंजिल की तलाश में राह मिली नयी। 

हर मोड़ पर अनुभव नये मिलते रहे हैं।। 


बन गयी जिंदगी संघर्ष की दास्तान। 

फल की चिंता बिना कर्म करते रहे हैं।। 


कोशिश की  कांटों ने लिपटने की। 

खिले फूल की खुश्बू से महकते रहे हैं।। 


 बुरा मिला तो बहुत कुछ अच्छा भी। 

इनसे इतर नया कुछ सीखते रहे हैं।। 


चलते हुए राह में मिले कुछ दोस्त नये। 

नीलम मत सोच पीछे कितने छूटते रहे हैं  ।। 

                

Tuesday, 27 June 2023

कलम

       कलम

मै कलम हूँ 

उतार देती हूँ भावनाएँ पन्नों पर 

निकलती हैं जो लेखक के 

मन की गहराइयों से

किसी के इश्क़ की नाकामियां

बेवफाईयां किसी आशिक की

गम की स्याही में डुबे जज़बात

किसी अपने से ही खार सी चुभती बातें

चाहत भरी ख्वाबों ख्यालों की रातें

लिख देती हूँ सबके मन के भाव 

वो प्रेम में डुबी हुई पहली मुलाकात

दिल में उठते हुए प्रणय के जज्बात

किसी को मिलने पर बढ़ना धड़कन का

किसी से बिछड़ने पर दिल के हालात

लिखने वाले की भावनाओं का हाल

मेल खा जाता है पढ़ने वाले के हाल से

मै  ही माध्यम बनती हूँ दोनों के बीच

मै ही रहती हूँ साक्षी  दोनों के दिल की

मैं कलम हूँ

बदल देती हूँ सबके तख्तोताज 

उगल देती हूँ सबके मन के राज

बहुत ताकतवर हूँ शमशीर से

मुझसे प्रभावित है कल और आज

मै कलम हूँ 

उतार देती हूँ भावनाएँ पन्नों पर 

निकलती हैं जो लेखक के 

मन की गहराइयों से

         



Sunday, 25 June 2023

मुंतज़िर

 मुंतज़िर हूँ आज भी तेरी इक आवाज का

गीत लिख लिए  कई इंतजार है साज का 

शायद इस तरह ढ़ूंढ़ पांऊ तेरे दिल में जगह

 बना सकूँ मुरीद तुझे अपने अल्फाज का 

Sunday, 18 June 2023

एक दिन

 


           एक दिन

आज तक भी कहाँ हूँ भूल पाई 

पापा संग बिताया दिन बचपन का

खूब घुमाया जीप में यहाँ वहाँ

रबड़ी, रसगुल्ला आईसक्रीम खिलाई

छोड़ कर रौब दाब हंसें खेले मुझ संग

उस दिन एक नया रूप देख पाई

मेरी मनपसंद जगह पर लेकर गए

ये देख भाई ने की  खूब लड़ाई

मै भी उस दिन अकड़ के बोली

पापा को मुझसे ज्यादा प्यार  है भाई

उलझते गए जिंदगी के झमेलों में वो

चाहकर भी फिर वैसा दिन ना बीता पाई


Thursday, 25 May 2023

अजाब

          अजाब 

ये जो‌ जिंदगी की किताब है 

इश्क़ में तो लगती लाजवाब है 

जब धोखा कर जाए आशिक 

विरह में यही लगती अजाब है

किसी रोते को हंसाते है जब 

यही जिंदगी लगती सबाब है

आशिक को मिल जाए महबूब

जिंदगी उसे बना देती नवाब है

प्यार में होता है जब भी कोई

उसे जिंदगी लगती शबाब है

बिछड़ जाए जिससे जब कोई

उसे लगती जिंदगी  खराब है

गर करते हो अपनों से बेवफाई

देना  पड़ेगा जिंदगी को जवाब है