ਜਦੋਂ ਭਾਵਨਾਵਾਂ ਦਾ ਸਮੁੰਦਰ
ਠਾਠੇ ਮਾਰਦਾ ਹੈ ਅੰਦਰ
ਪੂਗਰਦੇੰ ਨੇ ਹਰਫ਼
ਜਿਵੇਂ ਬਹੁਤਾ ਗਰਮੀ ਚ
ਪੂਗਰਦੀ ਹੈ ਬਰਫ਼
अहसास
जब से दिल के अहसास मर गए।
जिंदगी के पल सुकून से भर गए।।
चलने लगे अपनी बनाई राह पर।
जब निकल समाज के डर गए।।
खौफ नहीं मरने का अब यारो।
खुद के लिए कूच जहाँ कर गए।।
राहों को ही मंजिल बना लिया।
लगा नहीं मुद्दत हो गई घर गए।।
मरने के बाद भी सुकून रहेगा।
वजूद अपना जिंदा छोड़ गर गए।।
खुशियाँ छोड़ लगे रहे धन बटोरने।
जो गए जहाँ से छोड़ सब जर गए।।
चाहत थी आसमां में उड़ने की ।
नीलम की आस है चाहे कट पर गए।।
फलसफे
फलसफे जिंदगी के चलते रहे हैं।
हरदम अलग रंग बिखरते रहे हैं।।
ढ़ूंढ़नी चाही जब जब खुशियाँ।
हर बार अलग पल दिखते रहे हैं।।
कैसे बांधू जिंदगी तुझे लफ़्ज़ों में।
उम्र के साथ सपने बदलते रहे हैं ।।
खुशी ठहरी ना गम को पनाह मिली।
दोनों एक दूसरे से ही बिछड़ते रहे हैं।।
मंजिल की तलाश में राह मिली नयी।
हर मोड़ पर अनुभव नये मिलते रहे हैं।।
बन गयी जिंदगी संघर्ष की दास्तान।
फल की चिंता बिना कर्म करते रहे हैं।।
कोशिश की कांटों ने लिपटने की।
खिले फूल की खुश्बू से महकते रहे हैं।।
बुरा मिला तो बहुत कुछ अच्छा भी।
इनसे इतर नया कुछ सीखते रहे हैं।।
चलते हुए राह में मिले कुछ दोस्त नये।
नीलम मत सोच पीछे कितने छूटते रहे हैं ।।
कलम
मै कलम हूँ
उतार देती हूँ भावनाएँ पन्नों पर
निकलती हैं जो लेखक के
मन की गहराइयों से
किसी के इश्क़ की नाकामियां
बेवफाईयां किसी आशिक की
गम की स्याही में डुबे जज़बात
किसी अपने से ही खार सी चुभती बातें
चाहत भरी ख्वाबों ख्यालों की रातें
लिख देती हूँ सबके मन के भाव
वो प्रेम में डुबी हुई पहली मुलाकात
दिल में उठते हुए प्रणय के जज्बात
किसी को मिलने पर बढ़ना धड़कन का
किसी से बिछड़ने पर दिल के हालात
लिखने वाले की भावनाओं का हाल
मेल खा जाता है पढ़ने वाले के हाल से
मै ही माध्यम बनती हूँ दोनों के बीच
मै ही रहती हूँ साक्षी दोनों के दिल की
मैं कलम हूँ
बदल देती हूँ सबके तख्तोताज
उगल देती हूँ सबके मन के राज
बहुत ताकतवर हूँ शमशीर से
मुझसे प्रभावित है कल और आज
मै कलम हूँ
उतार देती हूँ भावनाएँ पन्नों पर
निकलती हैं जो लेखक के
मन की गहराइयों से
मुंतज़िर हूँ आज भी तेरी इक आवाज का
गीत लिख लिए कई इंतजार है साज का
शायद इस तरह ढ़ूंढ़ पांऊ तेरे दिल में जगह
बना सकूँ मुरीद तुझे अपने अल्फाज का
एक दिन
आज तक भी कहाँ हूँ भूल पाई
पापा संग बिताया दिन बचपन का
खूब घुमाया जीप में यहाँ वहाँ
रबड़ी, रसगुल्ला आईसक्रीम खिलाई
छोड़ कर रौब दाब हंसें खेले मुझ संग
उस दिन एक नया रूप देख पाई
मेरी मनपसंद जगह पर लेकर गए
ये देख भाई ने की खूब लड़ाई
मै भी उस दिन अकड़ के बोली
पापा को मुझसे ज्यादा प्यार है भाई
उलझते गए जिंदगी के झमेलों में वो
चाहकर भी फिर वैसा दिन ना बीता पाई
अजाब
ये जो जिंदगी की किताब है
इश्क़ में तो लगती लाजवाब है
जब धोखा कर जाए आशिक
विरह में यही लगती अजाब है
किसी रोते को हंसाते है जब
यही जिंदगी लगती सबाब है
आशिक को मिल जाए महबूब
जिंदगी उसे बना देती नवाब है
प्यार में होता है जब भी कोई
उसे जिंदगी लगती शबाब है
बिछड़ जाए जिससे जब कोई
उसे लगती जिंदगी खराब है
गर करते हो अपनों से बेवफाई
देना पड़ेगा जिंदगी को जवाब है