अहसास
जब से दिल के अहसास मर गए।
जिंदगी के पल सुकून से भर गए।।
चलने लगे अपनी बनाई राह पर।
जब निकल समाज के डर गए।।
खौफ नहीं मरने का अब यारो।
खुद के लिए कूच जहाँ कर गए।।
राहों को ही मंजिल बना लिया।
लगा नहीं मुद्दत हो गई घर गए।।
मरने के बाद भी सुकून रहेगा।
वजूद अपना जिंदा छोड़ गर गए।।
खुशियाँ छोड़ लगे रहे धन बटोरने।
जो गए जहाँ से छोड़ सब जर गए।।
चाहत थी आसमां में उड़ने की ।
नीलम की आस है चाहे कट पर गए।।
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