फलसफे
फलसफे जिंदगी के चलते रहे हैं।
हरदम अलग रंग बिखरते रहे हैं।।
ढ़ूंढ़नी चाही जब जब खुशियाँ।
हर बार अलग पल दिखते रहे हैं।।
कैसे बांधू जिंदगी तुझे लफ़्ज़ों में।
उम्र के साथ सपने बदलते रहे हैं ।।
खुशी ठहरी ना गम को पनाह मिली।
दोनों एक दूसरे से ही बिछड़ते रहे हैं।।
मंजिल की तलाश में राह मिली नयी।
हर मोड़ पर अनुभव नये मिलते रहे हैं।।
बन गयी जिंदगी संघर्ष की दास्तान।
फल की चिंता बिना कर्म करते रहे हैं।।
कोशिश की कांटों ने लिपटने की।
खिले फूल की खुश्बू से महकते रहे हैं।।
बुरा मिला तो बहुत कुछ अच्छा भी।
इनसे इतर नया कुछ सीखते रहे हैं।।
चलते हुए राह में मिले कुछ दोस्त नये।
नीलम मत सोच पीछे कितने छूटते रहे हैं ।।
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