फितूर
जज्बा ये इश्क़ का सबको
ना जाने क्यूँ लगता फितूर है
यहाँ हर इक है दीवाना
इश्क़ के नशे में चूर है
चाहतों पर किसका जोर है
हर कोई आशिकी में मगरूर है
प्यार इबादत का ही रुप है
खुदा को भी इसपर गरुर है
ये तो नेमत है खुदा की
हर एक को चाहिए जरूर है
खुशियाँ ढूँढते हैं सब इसमें
इसी से तो जिंदगी भरपूर है
सदियों से चली आई है प्रथा
आशिकों के किस्से मशहूर है
जज्बा ये इश्क़ का सबको
ना जाने क्यूँ लगता फितूर है