Friday, 7 April 2023

संस्कार

 संस्कार

बहा कर पसीना ऊंचा तेरा मुकाम कर दिया

उम्र भर की कमाई को तेरे नाम कर दिया 


जब भी देखा तुझे किसी मुश्किल में फसे हुए

किसी की परवाह  बिना सब काम कर दिया 


जब भी उठी किसी की बुरी निगाह तेरी तरफ

उसकी हर  सोच हसरत को नाकाम कर दिया


बहुत गर्व था अपने दिए संस्कारों पर मुझे

 बड़ा ओहदा मिलते ही मुझे गुमनाम कर दिया


मैं रहा तेरे लिए घणी छांव सा पेड़ हरदम

तुने मेरी सारी  हसरतों का कत्लेआम कर दिया


न्योछावर कर दी सारी जवानी तुझे बनाने में

 साथ छोड़ बुढ़ापे में मेरा जीना हराम कर दिया

              


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