संस्कार
बहा कर पसीना ऊंचा तेरा मुकाम कर दिया
उम्र भर की कमाई को तेरे नाम कर दिया
जब भी देखा तुझे किसी मुश्किल में फसे हुए
किसी की परवाह बिना सब काम कर दिया
जब भी उठी किसी की बुरी निगाह तेरी तरफ
उसकी हर सोच हसरत को नाकाम कर दिया
बहुत गर्व था अपने दिए संस्कारों पर मुझे
बड़ा ओहदा मिलते ही मुझे गुमनाम कर दिया
मैं रहा तेरे लिए घणी छांव सा पेड़ हरदम
तुने मेरी सारी हसरतों का कत्लेआम कर दिया
न्योछावर कर दी सारी जवानी तुझे बनाने में
साथ छोड़ बुढ़ापे में मेरा जीना हराम कर दिया
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