सार यही है
जिंदगी तेरा सार यही है
तुझसे हमेशा रार रही है
तमन्ना तो फूलों की थी
तुझसे मिले वो खार सही है
जीत ली थी तुझसे जंग मैनें
जब सब कहते थे हार रही है
पकड़ा दामन तो छोड़ा नहीं
चाहे अब सब कुछ वार रही है
गहरे समुद्र में उतर के देखा है
क्यूँ लगता जिंदगी थार रही है
क्यूँ उलझनों के बाद लगता है
परेशानियां दिन चार रही है
किसलिए होती है उदास नीलम
जब खुशियाँ ठाठे मार रही है